नए संकल्प के साथ दो दिवसीय विहासा वर्कशॉप का समापन


अपने जीवन को वटवृक्ष की तरह विशाल बनाएं
– समापन पर सौ से अधिक डॉक्टर्स ने लिया अपने पेशे के साथ न्याय करने का संकल्प
– एक्टीविटीज से बताया विचारों और मेडिटेशन का महत्व
1 सितंबर, भोपाल।
अपना जीवन वटवृक्ष की तरह विशाल बनाएं। जितना बड़ा वटवृक्ष होता है उसकी जड़े उतनी ही गहराई तक जमीं और फैली होती हैं। साथ ही उसकी शाखाएं भी उतनी ही ज्यादा निकली होती हैं। हमारा जीवन वैल्यूज, पीस, पॉजीटीविटी, कम्पेशन, को-ऑपरेशन, वैल्यूंग यूवरसेल्फ, स्प्रीचुऑलिटी इन यूवरसेल्फ से परिपूर्ण और समृद्ध हो। क्योंकि डॉक्टर्स का पेशा हाईरिस्क प्रोफेशन है। हमारे अंदर जितनी इनर पॉवर, इनर वैल्यु होती हम उतने ज्यादा लोगों की मदद कर सकते हैं। आज मरीजों को दवा से ज्यादा हीलिंग पावर (दुआ, दया, करुणा, अपनापन) की जरूरत है। हमारा प्रेमपूर्ण और अपनेपन का व्यवहार मरीज को दर्द से बाहर निकलने में लिफ्ट का काम करते है।
यह बात माउंट आबू से पधारीं स्प्रीचुअल काउंसलर बीके कल्पना ने कही। ब्रह्ााकुमारीज संस्थान के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन में आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप का समापन रविवार को हो गया। वैल्यु इन हेल्थ केयर ए स्प्रीचुअल एप्रोच विषय पर आयोजित वर्कशॉप में शहर के सौ से अधिक डॉक्टर्स ने भाग लिया। इन दो दिन में अलग-अलग वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज मरीज को दवा से ज्यादा हीलिंग पावर की जरूरत है। बीके कल्पना ने कहा कि नियमित राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से हमारे अंदर शांति की शक्ति और माइंड पावर बढ़ती है। कई डॉक्टर्स का अनुभव है कि उन्होंने अपनी लाइफ में मेडिटेशन की प्रैक्टिस के बाद आतंरिक रूप से कई बदलाव महसूस किए हैं। अब उनसे मरीज पहले से ज्यादा संतुष्ट, खुश होकर अपने घर लौटते हैं।
विहासा टीम के को-ऑर्डिनेटर जेहनगिर हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट व फिजिशियन डॉ. मनोज मथनानी ने मनोवैज्ञानिक रीति से सभी से फॉर्म भरवाकर अलग-अलग प्रश्नों के माध्यम से सभी डॉक्टर्स से यह जानने की कोशिश की कि उन्हें किन परिस्थितयों में गुस्सा आता है, उनकी जीवन की कौन सी ऐसी गलती है जिसका मलाल आज भी उन्हें है। वह मरीजों को कैसे अटेंड करते हैं। परिवार और प्रोफेशन में कैसे मैनेज करते हैं। साथ ही विभिन्ना सवालों से आए आंसर के बाद उन्होंने सभी को बेहतर जवाब दिया। इस दौरान नई दिल्ली से मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना तोमर, माउंट आबू से ग्लोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की फिजियोशोथैरेपिस्ट डॉ. हेमलता पीटी, फॉरेन बैंक इन गुरुग्राम की एचआर हैड बीके प्रभा शर्मा, दिल्ली से राजयोग मेडिटेशन टीचर बीके दिव्या ने सभी को मोटिवेट करते हुए स्प्रीचुअलिटी का महत्व बताया।

इन सात विषयों पर किया फोकस
मूल्य- मूल्य एक दूसरे से जुड़े होते हैं। यदि हमारे जीवन में एक मूल्य आता है तो दूसरा अपना आप आ जाता है। अपने प्रोफेशन में मूल्यों को वरीयता देते हुए कार्य करें
पीस- शांति को शक्ति कहा जाता है। प्रत्येक मनुष्य का उद्देश्य ही जीवन में सुख-शांति होता है। अपने फैमिली मेंबर, स्टाफ, मरीज के साथ शांतिपूर्ण व्यवहार करें। कुछ ही दिनों में आप बदलाव महसूस करेंगे।
पॉजीटीविटी- सकारात्मक चिंतन से विचारों में चहां रचनात्मकता बढ़ती है वहीं विचार शक्तिशाली होते हैं। ये सबसे बड़ा टूल है।
कम्पेशन- मरीज के प्रति दया, रहम और अपनेपन का भाव हो। वह जल्दी ठीक होगा।
को-ऑपरेशन- अपनी टीम के साथ समन्वय बनाकर और सामंजस्य बनाकर चलें।
वैल्यूंग यूवरसेल्फ- नकारात्मक विचारों से स्वयं की रक्षा करना जरूरी है।
स्प्रीचुऑलिटी इन यूवरसेल्फ- स्प्रीचुऑलिटी से हमारी इनर पावर बढ़ती है। जो हमारे प्रोफेशन में हीलिंग करने में मदद करती है।

फोटो- वर्कशॉप में तीन ग्रुप बनाकर अलग-अलग एक्टीविटीज कराईं गईं