सिस्टर शिवानी द्वारा खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित



मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है ये मेरी च्वॉइस है: सिस्टर शिवानी
– खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम मिंटो हॉल में आयोजित
– अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर सिस्टर शिवानी दीदीजी ने बताए सफल-सुखमय जीवन के सूत्र
– शहरभर से बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकगण पहुंचे
20 सितंबर, भोपाल।
मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है, मुझे कैसा फील करना है, मेरी मानसिक स्थिति क्या है, कोई भी परिस्थिति मेरी मन की स्थिति को डिस्टर्ब तो नहीं करती… ये मेरी च्वॉइस है। हमारे जैसे संकल्प होंगे, वैसी वाणी होगी। जैसी वाणी होगी वैसे कर्म होंगे। जैसे कर्म होंगे वैसा हमारा, संस्कार (आदत) बन जाएगा…जो हमारे भाग्य का निर्माण करता है। हम अपना भाग्य कैसा बनाना चाहते हैं, ये हम पर निर्भर करता है। इसलिए मन में किसी भी संकल्प का चुनाव या क्रियेट करने के पहले सोचें। सोचने के पहले भी सोचें। क्या वह संकल्प मेरे लिए ठीक है।
यह सीख अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर, जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी दीदी ने दी। शुक्रवार को मिंटो हॉल में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन की ओर से खुशियां आपके द्वार विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली से पधारीं जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी ने संकल्प, कर्म, संस्कार, भाग्य और पारिवारिक संबंधों को मधुर बनाने के लिए अपने विचार व्यक्त करते हुए जीवन को सुखी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


नवरात्र नौ दिन की नहीं पूरा जीवन हो सात्विक और पवित्र…
उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में नवरात्र पर्व आने वाला है। नवरात्र में हम शक्ति का आह्नान करते हैं और नौ दिन जागरण, व्रत, सात्विकता और रास करते हैं। नवरात्र नौ दिन का नहीं हमारा पूरा जीवन ही नवरात्र की तरह शक्ति, मर्यादा, सात्विकता, रास (आनंदमय) हो। दैवी का आह्नान हमें अपने मन में करना है। जब मन में, संकल्प में दैवी गुणों का आह्नान करेंगे वैसे ही हमारे संस्कार बनते जाएंगे।

नवरात्र का इस तरह बताया महत्व…
1. जागरण- अपनी आत्मा को अज्ञान-अंधकार से जगाना है। उसे सदा पवित्र, शक्तिशाली संकल्प देकर अज्ञानता (व्यर्थ विचार, चिंता, दु:ख) से दूर रखना है।
2. व्रत- आज से ही ये व्रत लें कभी भी गुस्सा नहीं करेंगे। सदा शांत रहेंगे। सभी से प्रेमयुक्त व्यवहार करेंगे। सदा मर्यादाओं की लकीर के अंदर रहेंगे।
3. सात्विकता- हमारी लाइफ स्टाइल सात्विक हो। संकल्प में भी किसी को दु:ख देना मतलब हम सात्विक नहीं हैं। हमारे घर में जो धन आ रहा है वह ईमानदारी का हो। क्योंकि यदि घर में लूट, बेईमानी और गलत तरीके का धन आएगा और उससे जो घर में अनाज आएगा तो उसके बाइव्रेशन भी वैसे ही होंगे। यदि धन सात्विक है तो अनाज भी सात्विक रहेगा और जैसा अन्न खाएंगे, वैसा मन होगा। यदि किसी जीव को अपना भोजन बनाएंगे तो हमारे मन में भी डर, दु:ख, चिंता के बाइव्रेशन आएंगे। इसलिए भोजन शुद्ध और पवित्र हो।
4. रास- परमात्मा कहते हैं जो आत्मा अपनी डिग्निटी (मर्यादा) को इमर्ज करती है अर्थात् सदा मर्यादा की लकीर में रहती है वही रास कर सकती है। आनंद में रह सकती है।

दैवी की आठ भुजाएं अष्ठ शक्तियों का प्रतीक…
1. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति: व्यस्त होते हुए भी मन को सदा हल्का रखें। बिजी लाइफ पर इजी लाइफ हो।
2. समेटने की शक्ति: व्यर्थ विचारों से खुद को समेटकर मन को पॉजीटिव थॉट्स देना।
3. समाने की शक्ति: परिवार में एक-दूसरे की कमी-कमजोरियों को अपने अंदर समाने की आदत डालें फिर देखिए आपके घर में ही सतयुग आ जाएगा।
4. परखने की शक्ति: कोई भी कर्म करने के पहले उसके फायदे और नुकसान को परखना जरूरी है।
5. निर्णय करने की शक्ति: अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय खुद लें। क्योंकि आपसे बेहतर खुद को कोई और नहीं जान सकता है।
6. सामना करने की शक्ति: यदि मन शक्तिशाली है तो बाह्य चुनौतियों व परिस्थिति का सामना करने की शक्ति आ जाती है।
7. सहयोग की शक्ति: घर में एक-दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देकर ऊपर उठने में मदद करें। सबसे बड़ी संख्या किसी दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देना है।
8. सहन करने की शक्ति: रिश्तों में जितना सहन करेंगे, उतने मजबूत बनेंगे। लोगों के संस्कारों को सहन करना है। जहां अन्याय या गलत हो रहा उसका सामना करना चाहिए।

हमारा नेचर हो… अनकंडीशनल लव
उन्होंने कहा कि सामने वाले का व्यवहार और प्यार कैसा भी हो, परिस्थिति कैसी भी हो पर हमारा नेचर अनकंडीशनल लव का होना चाहिए। प्रेम आत्मा का स्वाभाविक गुण है। हम किसी को व्यवहार देखकर या परिस्थिति के हिसाब से किसी के साथ व्यवहार न करें। यदि हमने अपना नेचर सदा प्रेमयुक्त बनाने का संकल्प ले लिया तो सामने वाला भले कैसा व्यवहार करे हम प्रेमयुक्त व्यवहार ही करेंगे। यही हमारा व्यक्तित्व होता है। जब सामने वाला अपनी आदत को नहीं बदल सकता तो फिर हम क्यों अपनी अच्छी आदत, संस्कार या व्यवहार को बदलें।

सुबह उठते ही मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें…
उन्होंने कहा कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपने मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें। दो मिनट या पांच मिनट परमात्मा का ध्यान करें। हर दिन एक पॉजीटिव पॉवरफुल संकल्प लें कि मैं आज इसका पूरी तरह से पालन करुंगा। उसे दिन में बीच-बीच में दोहराते रहें, ताकि याद बना रहे। सुबह उठने के बाद एक घंटे तक मोबाइल और वॉट्सएप से दूर रहें। राजयोगी वही है जिसका अपने मन-वचन और कर्म पर नियंत्रण है। जो आत्मा खुद पर राज करती है वही राजयोगी है। राजयोग मेडिटेशन वह विधि है जिसके माध्यम से हम परमात्मा से अपना संबंध जोड़ते हैं। सुबह मेडिटेशन से परमात्मा से एनर्जी लेने पर हम सारा दिन अच्छे से वर्क कर सकते हैं।

माफ कर दें और माफी मांग लें…
उन्होंने कहा कि यदि हम इस जन्म के कड़े संस्कारों, बुरे अनुभव, घटनाओं को अगले जन्म में अपने साथ नहीं ले जाना चाहते हैं तो लोगों को माफ कर दें और उनसे मन ही मन माफी मांग लें। हमें लाइट या हल्के रहना है तो पुरानी बातें छोडऩा होगा। क्योंकि ज्यादा दिन तक पुरानी बातों को मन में रखने से आत्मा भारी होती है और मन की शक्ति कमजोर हो जाती है। हमने कल नाश्ते में क्या किया था ये ज्यादातर लोगों को याद नहीं होगा पर किसी ने एक बात दस साल पहले कही होगी तो वह आज भी याद होगी। पुरानी बातों को मन में रखकर चलना बोझा ढोने के समान है।

मन के दीपक को जलाएं, अंधेरा भाग जाएगा…
उन्होंने कहा कि दीपावली की तरह अपने मन के आंचल में ज्ञान का, पवित्रता और शुद्ध विचारों को दीप जलाएं तो अज्ञान का अंधकार भाग जाएगा। दीपावली में एक दीपक से हम हजारों दीपक को जला देते हैं, इसलिए आज से अपने घर का दीपक आप बनें। खुद की ज्योत को सदा पॉजीटिव संकल्पों से जलाएं रखेंगे तो परिवार के अन्य सदस्यों की ज्योत आपको देखकर ही जल जाएगी।

सिस्टर शिवानी ने खुशमय जीवन के ये सूत्र भी बताए….
– किसी को हम जो निर्णय देते हैं वह अपनी क्षमता से देते हैं, जबकि प्रत्येक आत्मा की क्षमता अपनी-अपनी है। किसी को हमने कोई सलाह दी और वह उसमें फैल हो गए तो कार्मिक एकाउंट बन जाता है। इसलिए सोच-समझकर ही किसी को सलाह देना चाहिए।
ृ- हम बाहर से मीठा बोल रहे हैं पर अंदर से हमारे विचार किसी के प्रति नेगेटिव हैं तो उस आत्मा तक नेगटिव बाइव्रेशन (प्रकम्पन) ही पहुंचेंगे। इसलिए हमारी कथनी और करनी एक समान हो।
– जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना, इससे हमारी एनर्जी बढऩे लगेगी।
– माता-पिता बच्चों की एनर्जी का डाउन कर देते हैं, एग्जाम की बोल-बोलकर। जबकि उनका हौसला बढ़ाएं, उन्हें हिम्मत दें। इससे एनर्जी बढ़ेगी।
– हमारा निर्णय, हमारा भाग्य लिखेंगे।
– एक-दूसरे को प्यार देंगे, सम्मान देंगे तो सतयुग आ जाएगा।
– आज चैक करें मेरी जीवन की कोई ऐसी आदत जिसे बदलने की जरूरत है।
– रिलेशनशिप में ज्यादा अचैटमेंट और अपेक्षाएं ही दु:ख का कारण बनती हैं।
– प्यार मतलब हमारी ओर से किसी को एनर्जी जाए तो वह पॉजीटिव हो।
– मेरी मन की स्थिति क्या है, कैसी रहनी चाहिए, मुझे कैसा फील करना है ये मुझ पर निर्भर है। मन में संकल्पों को क्रियेट करना ये हमारी च्वॉइस है।
– मेरा इस जन्म का कर्म, संस्कार ही साथ में जाता है।
– मन में जो भी गांठें बनी हैं उन्हें आज इसी हॉल में खोल दें, क्या पता कौन सा क्षण हमारा अंतिम क्षण हो और वह गांठें साथ चलीं जाएं।

ये रहे उपस्थित…
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके अवधेश दीदी, सुख-शांति भवन की डायरेक्टर बीके नीता दीदी सहित शहर से पधारे गणमान्य नागरिक, आईएएस, आईपीएस, जनप्रतिनिधि, डॉक्टर्स सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।