भारत को विश्वगुरु बनाने के तहत भोपाल में आयोजित कार्यक्रम श्रंखला

14 oct 2019,Bhopal
AIIMS Bhopal – VIHASA
Speakers;
1 Dr.Hina(mount abu)
2 Dr.donika(Aurangabaad)

23/25 Battallion (police)

speech on Holistic Health by BK Dr. Savita (mount abu,raj.) in IMS conference organised by Bhopal Menopause Society in Hotel courtyard marriot

Surabhi Groups of Institutions

At Airport Authority Bhopal

सिस्टर शिवानी द्वारा खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित



मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है ये मेरी च्वॉइस है: सिस्टर शिवानी
– खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम मिंटो हॉल में आयोजित
– अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर सिस्टर शिवानी दीदीजी ने बताए सफल-सुखमय जीवन के सूत्र
– शहरभर से बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकगण पहुंचे
20 सितंबर, भोपाल।
मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है, मुझे कैसा फील करना है, मेरी मानसिक स्थिति क्या है, कोई भी परिस्थिति मेरी मन की स्थिति को डिस्टर्ब तो नहीं करती… ये मेरी च्वॉइस है। हमारे जैसे संकल्प होंगे, वैसी वाणी होगी। जैसी वाणी होगी वैसे कर्म होंगे। जैसे कर्म होंगे वैसा हमारा, संस्कार (आदत) बन जाएगा…जो हमारे भाग्य का निर्माण करता है। हम अपना भाग्य कैसा बनाना चाहते हैं, ये हम पर निर्भर करता है। इसलिए मन में किसी भी संकल्प का चुनाव या क्रियेट करने के पहले सोचें। सोचने के पहले भी सोचें। क्या वह संकल्प मेरे लिए ठीक है।
यह सीख अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर, जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी दीदी ने दी। शुक्रवार को मिंटो हॉल में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन की ओर से खुशियां आपके द्वार विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली से पधारीं जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी ने संकल्प, कर्म, संस्कार, भाग्य और पारिवारिक संबंधों को मधुर बनाने के लिए अपने विचार व्यक्त करते हुए जीवन को सुखी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


नवरात्र नौ दिन की नहीं पूरा जीवन हो सात्विक और पवित्र…
उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में नवरात्र पर्व आने वाला है। नवरात्र में हम शक्ति का आह्नान करते हैं और नौ दिन जागरण, व्रत, सात्विकता और रास करते हैं। नवरात्र नौ दिन का नहीं हमारा पूरा जीवन ही नवरात्र की तरह शक्ति, मर्यादा, सात्विकता, रास (आनंदमय) हो। दैवी का आह्नान हमें अपने मन में करना है। जब मन में, संकल्प में दैवी गुणों का आह्नान करेंगे वैसे ही हमारे संस्कार बनते जाएंगे।

नवरात्र का इस तरह बताया महत्व…
1. जागरण- अपनी आत्मा को अज्ञान-अंधकार से जगाना है। उसे सदा पवित्र, शक्तिशाली संकल्प देकर अज्ञानता (व्यर्थ विचार, चिंता, दु:ख) से दूर रखना है।
2. व्रत- आज से ही ये व्रत लें कभी भी गुस्सा नहीं करेंगे। सदा शांत रहेंगे। सभी से प्रेमयुक्त व्यवहार करेंगे। सदा मर्यादाओं की लकीर के अंदर रहेंगे।
3. सात्विकता- हमारी लाइफ स्टाइल सात्विक हो। संकल्प में भी किसी को दु:ख देना मतलब हम सात्विक नहीं हैं। हमारे घर में जो धन आ रहा है वह ईमानदारी का हो। क्योंकि यदि घर में लूट, बेईमानी और गलत तरीके का धन आएगा और उससे जो घर में अनाज आएगा तो उसके बाइव्रेशन भी वैसे ही होंगे। यदि धन सात्विक है तो अनाज भी सात्विक रहेगा और जैसा अन्न खाएंगे, वैसा मन होगा। यदि किसी जीव को अपना भोजन बनाएंगे तो हमारे मन में भी डर, दु:ख, चिंता के बाइव्रेशन आएंगे। इसलिए भोजन शुद्ध और पवित्र हो।
4. रास- परमात्मा कहते हैं जो आत्मा अपनी डिग्निटी (मर्यादा) को इमर्ज करती है अर्थात् सदा मर्यादा की लकीर में रहती है वही रास कर सकती है। आनंद में रह सकती है।

दैवी की आठ भुजाएं अष्ठ शक्तियों का प्रतीक…
1. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति: व्यस्त होते हुए भी मन को सदा हल्का रखें। बिजी लाइफ पर इजी लाइफ हो।
2. समेटने की शक्ति: व्यर्थ विचारों से खुद को समेटकर मन को पॉजीटिव थॉट्स देना।
3. समाने की शक्ति: परिवार में एक-दूसरे की कमी-कमजोरियों को अपने अंदर समाने की आदत डालें फिर देखिए आपके घर में ही सतयुग आ जाएगा।
4. परखने की शक्ति: कोई भी कर्म करने के पहले उसके फायदे और नुकसान को परखना जरूरी है।
5. निर्णय करने की शक्ति: अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय खुद लें। क्योंकि आपसे बेहतर खुद को कोई और नहीं जान सकता है।
6. सामना करने की शक्ति: यदि मन शक्तिशाली है तो बाह्य चुनौतियों व परिस्थिति का सामना करने की शक्ति आ जाती है।
7. सहयोग की शक्ति: घर में एक-दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देकर ऊपर उठने में मदद करें। सबसे बड़ी संख्या किसी दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देना है।
8. सहन करने की शक्ति: रिश्तों में जितना सहन करेंगे, उतने मजबूत बनेंगे। लोगों के संस्कारों को सहन करना है। जहां अन्याय या गलत हो रहा उसका सामना करना चाहिए।

हमारा नेचर हो… अनकंडीशनल लव
उन्होंने कहा कि सामने वाले का व्यवहार और प्यार कैसा भी हो, परिस्थिति कैसी भी हो पर हमारा नेचर अनकंडीशनल लव का होना चाहिए। प्रेम आत्मा का स्वाभाविक गुण है। हम किसी को व्यवहार देखकर या परिस्थिति के हिसाब से किसी के साथ व्यवहार न करें। यदि हमने अपना नेचर सदा प्रेमयुक्त बनाने का संकल्प ले लिया तो सामने वाला भले कैसा व्यवहार करे हम प्रेमयुक्त व्यवहार ही करेंगे। यही हमारा व्यक्तित्व होता है। जब सामने वाला अपनी आदत को नहीं बदल सकता तो फिर हम क्यों अपनी अच्छी आदत, संस्कार या व्यवहार को बदलें।

सुबह उठते ही मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें…
उन्होंने कहा कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपने मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें। दो मिनट या पांच मिनट परमात्मा का ध्यान करें। हर दिन एक पॉजीटिव पॉवरफुल संकल्प लें कि मैं आज इसका पूरी तरह से पालन करुंगा। उसे दिन में बीच-बीच में दोहराते रहें, ताकि याद बना रहे। सुबह उठने के बाद एक घंटे तक मोबाइल और वॉट्सएप से दूर रहें। राजयोगी वही है जिसका अपने मन-वचन और कर्म पर नियंत्रण है। जो आत्मा खुद पर राज करती है वही राजयोगी है। राजयोग मेडिटेशन वह विधि है जिसके माध्यम से हम परमात्मा से अपना संबंध जोड़ते हैं। सुबह मेडिटेशन से परमात्मा से एनर्जी लेने पर हम सारा दिन अच्छे से वर्क कर सकते हैं।

माफ कर दें और माफी मांग लें…
उन्होंने कहा कि यदि हम इस जन्म के कड़े संस्कारों, बुरे अनुभव, घटनाओं को अगले जन्म में अपने साथ नहीं ले जाना चाहते हैं तो लोगों को माफ कर दें और उनसे मन ही मन माफी मांग लें। हमें लाइट या हल्के रहना है तो पुरानी बातें छोडऩा होगा। क्योंकि ज्यादा दिन तक पुरानी बातों को मन में रखने से आत्मा भारी होती है और मन की शक्ति कमजोर हो जाती है। हमने कल नाश्ते में क्या किया था ये ज्यादातर लोगों को याद नहीं होगा पर किसी ने एक बात दस साल पहले कही होगी तो वह आज भी याद होगी। पुरानी बातों को मन में रखकर चलना बोझा ढोने के समान है।

मन के दीपक को जलाएं, अंधेरा भाग जाएगा…
उन्होंने कहा कि दीपावली की तरह अपने मन के आंचल में ज्ञान का, पवित्रता और शुद्ध विचारों को दीप जलाएं तो अज्ञान का अंधकार भाग जाएगा। दीपावली में एक दीपक से हम हजारों दीपक को जला देते हैं, इसलिए आज से अपने घर का दीपक आप बनें। खुद की ज्योत को सदा पॉजीटिव संकल्पों से जलाएं रखेंगे तो परिवार के अन्य सदस्यों की ज्योत आपको देखकर ही जल जाएगी।

सिस्टर शिवानी ने खुशमय जीवन के ये सूत्र भी बताए….
– किसी को हम जो निर्णय देते हैं वह अपनी क्षमता से देते हैं, जबकि प्रत्येक आत्मा की क्षमता अपनी-अपनी है। किसी को हमने कोई सलाह दी और वह उसमें फैल हो गए तो कार्मिक एकाउंट बन जाता है। इसलिए सोच-समझकर ही किसी को सलाह देना चाहिए।
ृ- हम बाहर से मीठा बोल रहे हैं पर अंदर से हमारे विचार किसी के प्रति नेगेटिव हैं तो उस आत्मा तक नेगटिव बाइव्रेशन (प्रकम्पन) ही पहुंचेंगे। इसलिए हमारी कथनी और करनी एक समान हो।
– जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना, इससे हमारी एनर्जी बढऩे लगेगी।
– माता-पिता बच्चों की एनर्जी का डाउन कर देते हैं, एग्जाम की बोल-बोलकर। जबकि उनका हौसला बढ़ाएं, उन्हें हिम्मत दें। इससे एनर्जी बढ़ेगी।
– हमारा निर्णय, हमारा भाग्य लिखेंगे।
– एक-दूसरे को प्यार देंगे, सम्मान देंगे तो सतयुग आ जाएगा।
– आज चैक करें मेरी जीवन की कोई ऐसी आदत जिसे बदलने की जरूरत है।
– रिलेशनशिप में ज्यादा अचैटमेंट और अपेक्षाएं ही दु:ख का कारण बनती हैं।
– प्यार मतलब हमारी ओर से किसी को एनर्जी जाए तो वह पॉजीटिव हो।
– मेरी मन की स्थिति क्या है, कैसी रहनी चाहिए, मुझे कैसा फील करना है ये मुझ पर निर्भर है। मन में संकल्पों को क्रियेट करना ये हमारी च्वॉइस है।
– मेरा इस जन्म का कर्म, संस्कार ही साथ में जाता है।
– मन में जो भी गांठें बनी हैं उन्हें आज इसी हॉल में खोल दें, क्या पता कौन सा क्षण हमारा अंतिम क्षण हो और वह गांठें साथ चलीं जाएं।

ये रहे उपस्थित…
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके अवधेश दीदी, सुख-शांति भवन की डायरेक्टर बीके नीता दीदी सहित शहर से पधारे गणमान्य नागरिक, आईएएस, आईपीएस, जनप्रतिनिधि, डॉक्टर्स सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

नए संकल्प के साथ दो दिवसीय विहासा वर्कशॉप का समापन


अपने जीवन को वटवृक्ष की तरह विशाल बनाएं
– समापन पर सौ से अधिक डॉक्टर्स ने लिया अपने पेशे के साथ न्याय करने का संकल्प
– एक्टीविटीज से बताया विचारों और मेडिटेशन का महत्व
1 सितंबर, भोपाल।
अपना जीवन वटवृक्ष की तरह विशाल बनाएं। जितना बड़ा वटवृक्ष होता है उसकी जड़े उतनी ही गहराई तक जमीं और फैली होती हैं। साथ ही उसकी शाखाएं भी उतनी ही ज्यादा निकली होती हैं। हमारा जीवन वैल्यूज, पीस, पॉजीटीविटी, कम्पेशन, को-ऑपरेशन, वैल्यूंग यूवरसेल्फ, स्प्रीचुऑलिटी इन यूवरसेल्फ से परिपूर्ण और समृद्ध हो। क्योंकि डॉक्टर्स का पेशा हाईरिस्क प्रोफेशन है। हमारे अंदर जितनी इनर पॉवर, इनर वैल्यु होती हम उतने ज्यादा लोगों की मदद कर सकते हैं। आज मरीजों को दवा से ज्यादा हीलिंग पावर (दुआ, दया, करुणा, अपनापन) की जरूरत है। हमारा प्रेमपूर्ण और अपनेपन का व्यवहार मरीज को दर्द से बाहर निकलने में लिफ्ट का काम करते है।
यह बात माउंट आबू से पधारीं स्प्रीचुअल काउंसलर बीके कल्पना ने कही। ब्रह्ााकुमारीज संस्थान के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन में आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप का समापन रविवार को हो गया। वैल्यु इन हेल्थ केयर ए स्प्रीचुअल एप्रोच विषय पर आयोजित वर्कशॉप में शहर के सौ से अधिक डॉक्टर्स ने भाग लिया। इन दो दिन में अलग-अलग वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज मरीज को दवा से ज्यादा हीलिंग पावर की जरूरत है। बीके कल्पना ने कहा कि नियमित राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से हमारे अंदर शांति की शक्ति और माइंड पावर बढ़ती है। कई डॉक्टर्स का अनुभव है कि उन्होंने अपनी लाइफ में मेडिटेशन की प्रैक्टिस के बाद आतंरिक रूप से कई बदलाव महसूस किए हैं। अब उनसे मरीज पहले से ज्यादा संतुष्ट, खुश होकर अपने घर लौटते हैं।
विहासा टीम के को-ऑर्डिनेटर जेहनगिर हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट व फिजिशियन डॉ. मनोज मथनानी ने मनोवैज्ञानिक रीति से सभी से फॉर्म भरवाकर अलग-अलग प्रश्नों के माध्यम से सभी डॉक्टर्स से यह जानने की कोशिश की कि उन्हें किन परिस्थितयों में गुस्सा आता है, उनकी जीवन की कौन सी ऐसी गलती है जिसका मलाल आज भी उन्हें है। वह मरीजों को कैसे अटेंड करते हैं। परिवार और प्रोफेशन में कैसे मैनेज करते हैं। साथ ही विभिन्ना सवालों से आए आंसर के बाद उन्होंने सभी को बेहतर जवाब दिया। इस दौरान नई दिल्ली से मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना तोमर, माउंट आबू से ग्लोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की फिजियोशोथैरेपिस्ट डॉ. हेमलता पीटी, फॉरेन बैंक इन गुरुग्राम की एचआर हैड बीके प्रभा शर्मा, दिल्ली से राजयोग मेडिटेशन टीचर बीके दिव्या ने सभी को मोटिवेट करते हुए स्प्रीचुअलिटी का महत्व बताया।

इन सात विषयों पर किया फोकस
मूल्य- मूल्य एक दूसरे से जुड़े होते हैं। यदि हमारे जीवन में एक मूल्य आता है तो दूसरा अपना आप आ जाता है। अपने प्रोफेशन में मूल्यों को वरीयता देते हुए कार्य करें
पीस- शांति को शक्ति कहा जाता है। प्रत्येक मनुष्य का उद्देश्य ही जीवन में सुख-शांति होता है। अपने फैमिली मेंबर, स्टाफ, मरीज के साथ शांतिपूर्ण व्यवहार करें। कुछ ही दिनों में आप बदलाव महसूस करेंगे।
पॉजीटीविटी- सकारात्मक चिंतन से विचारों में चहां रचनात्मकता बढ़ती है वहीं विचार शक्तिशाली होते हैं। ये सबसे बड़ा टूल है।
कम्पेशन- मरीज के प्रति दया, रहम और अपनेपन का भाव हो। वह जल्दी ठीक होगा।
को-ऑपरेशन- अपनी टीम के साथ समन्वय बनाकर और सामंजस्य बनाकर चलें।
वैल्यूंग यूवरसेल्फ- नकारात्मक विचारों से स्वयं की रक्षा करना जरूरी है।
स्प्रीचुऑलिटी इन यूवरसेल्फ- स्प्रीचुऑलिटी से हमारी इनर पावर बढ़ती है। जो हमारे प्रोफेशन में हीलिंग करने में मदद करती है।

फोटो- वर्कशॉप में तीन ग्रुप बनाकर अलग-अलग एक्टीविटीज कराईं गईं

भोपाल में दो दिवसीय विहासा वर्कशॉप का आयोजन


भोपाल ३१ अगस्त 2019: डॉक्टर्स को पहले खुद को ठीक करना होगा: डॉ. मनोज, मोटिवेशनल स्पीकर
– मेडिकल एजुकेशन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी शिवशेखर शुक्ला बोले- हमारा व्यवहार दिखावटी नहीं बल्कि अंदर से साफ और स्वच्छ हो।
– विहासा की पुणे, दिल्ली और माउंट आबू से आए मोटिवेशनल स्पीकर्स और मेंटर ने शहर के डॉक्टर्स को खेल-खेल में बताया वैल्यूज का महत्व
– दो दिवसीय विहासा वर्कशॉप का शुभारंभ, आज भी फुल डे चलेगी
31 अगस्त, भोपाल।
ब्रह्ााकुमारीज़ संस्थान के नीलबड़ सुख-शांति भवन में शनिवार से दो दिवसीय विहासा वर्कशॉप की शुरुआत की गई। इसमें पहले विहासा टीम के दिल्ली, पुणे और माउंट से पधारे मेंटर व मोटिवेशनल स्पीकर्स ने शहर के डॉक्टर्स के लिए ग्रुप डिस्कशन, वैल्यूज गेम्स, अफरमेशन और पेटिंग्स के जरिए लाइफ में वैल्यूज, हेल्थ, हैप्पीनेस और स्प्रीचुऑलिटी का महत्व बताया। वर्कशॉप का आयोजन ब्रह्ााकुमारीज़ के मेडिकल विंग की ओर से किया गया। इसमें शहर के नामी गिरामी सौ से अधिक डॉक्टर्स ने भाग लिया। वर्कशॉप में रविवार को भी सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक अलग-अलग एक्टीविटीज और मोटिवेशनल सेशन के द्वारा डॉक्टर्स को मोटिवेट किया जाएगा। साथ ही एक्सपर्ट द्वारा राजयोग मेडिटेशन के टिप्स बताए जाएंगे।
मरीज का डॉक्टर पर विश्वास जरूरी…
कार्यशाला के उद्घाटन पर मुख्य अतिथि मेडिकल एजुकेशन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि जिस विषय को लेकर कार्यशाला रखी गयी है वर्तमान में ये सभी डॉक्टरों के लिए बहुत जरूरी है। समाज में डॉक्टर पर विश्वास नहीं तो कैसे मरीज का विश्वास बढ़ेगा। हमारा व्यवहार दिखावटी नहीं बल्कि अंदर से साफ और स्वच्छ हो।
डॉक्टर्स को पहले खुद को ठीक करना होगा…
पुणे से पधारे विहासा टीम के को-ऑर्डिनेटर जेहनगिर हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट व फिजिशियन डॉ. मनोज मथनानी ने कहा कि डॉक्टर्स का पेशा हाईरिस्क प्रोफेशन है। हम जितना दुआएं कमा सकते हैं तो उतना ही उसके अपोजिट भी। आज हमारे अंदर सेल्फ स्ट्रीम कम हो गया है। हमें टटोलना होगा कि हम जिम्मेदार हैं कि वो (पेसेंट) जिम्मेदार हैं। वैल्यूज की कमी के कारण ही आज डॉक्टर्स और पेसेंट के बीच ये खाई आती जा रही है। इस रिलेशन को सुधारने और विस्वास पूर्ण बनाए रखने के लिए हमें मंथन करना होगा। विहासा प्रोग्राम का उद्देश्य पर्सनल डेवलपमेंट है। पहले डॉक्टर को खुद ठीक करना होगा। टीम वर्क से काम करना होगा।
दिनचर्या में शामिल करें मेडिटेशन….
ब्रह्माकुमारीज़ के भोपाल जोन की जोनल डायरेक्टर ब्रह्माकुमारी अवदेश दीदी ने कहा कि डॉक्टर का पेशा बहुत जिम्मेदारी पूर्ण और धैर्यता वाला है। अपनी दिनचर्या में मेडिटेशन शामिल करें। इससे हमारी इनर पॉवर बढ़ती है। छतरपुर से पधारीं ब्रह्माकुमारी शैलजा दीदी ने कहा कि यदि जीवन में शांति और प्रेम है तो सबकुछ है। सुख- शांति भवन की डायरेक्टर ब्रह्माकुमारी नीता दीदी ने स्वागत भाषण देते हुए, कार्यशाला को डॉक्टर्स के लिए उपयोगी बताया। संचालन बीके राम भाई ने किया।
तीन ग्रुप बनाकर कराई एक्टिविटीज…
वर्कशॉप के शुभारंभ के बाद सभी पार्टिसिपेंड के तीन ग्रुप बनाए गए। तीनों के वैल्यूज पर नाम रखे गए। इसके बाद डॉक्टर्स को एक-दूसरे के बारे में जानने के लिए कहा गया। साथ ही अपने जीवन की एक विशेषता और मूल्य सांझा करने के लिए कहा। इसके बाद सभी को अपना मेंटर, फेवरेट सॉन्ग, बुक, सीन, प्लेस आदि के बारे में फॉर्म के माध्यम से लिखवाकर उन्हें मंच से शेयर करके सभी को बताया गया। इस दौरान नई दिल्ली से मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना तोमर, माउंट आबू से ग्लोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की फिजियोशोथैरेपिस्ट डॉ. हेमलता पीटी, फॉरेन बैंक इन गुरुग्राम की एचआर हैड बीके प्रभा शर्मा, माउंट आबू से स्प्रीचुअल काउंसलर बीके कल्पना, दिल्ली से राजयोग मेडिटेशन टीचर बीके दिव्या स्प्रीचुअलिटी पर अपने अनुभव शेयर किए।

पीस, लव, हैप्पी और हेल्दी लाइफ के लिए ये मंत्र दिए…..
– दिन की शुरुआत पॉजिटिव अफर्मेशन के साथ करें।
– रोजाना कुछ समय निकालकर मेडिटेशन जरूर करें, इससे क्रिएटिविटी बढ़ेगी और अपने गोल पर अच्छे से फोकस कर पाएंगे।
– अपने फैमली मेम्बर में जो वैल्यूज हैं उनकी सराहना करें और उन्हें मोटिवेट करें।
– ऑफिस या अपने वर्कप्लेस पर जाते ही
सभी को गुड मॉर्निंग करें, इससे पॉजिटिव वाइब्रेशन फैलते हैं माहौल खुशनुमा होता है।
– जब डॉक्टर्स हॉस्पिटल में एडमिट मरीज को देखते जाते हैं तो उनकी पूरी बात सुनें और प्रेमपूर्ण व्यवहार करने से वह जल्दी ठीक होता है।
– एक पेसेंट का डॉक्टर्स के प्रति जितना ज्यादा ट्रस्ट होता है वह उतनी जल्दी ठीक होता है,इसलिए पेसेंट का ट्रस्ट बनाए रखें।
– डॉक्टर्स को एक अच्छा मेंटर, मोटिवेशनल और क्रिएटिव नेचर का होना चाहिए।
– अपनी दिनचर्या में से कुछ समय निकालकर अपनी हॉबीज को टाइम दें।
– डॉक्टर्स के अंदर पेसंस होना बहुत जरूरी है।

लाइफ में मेंटली हेल्थ के ये टूल्स इम्पोर्टेन्ट…
– मेडिटेशन
– विजुलाइजेशन
– रिफ्लेक्शन
– एप्रिसिएशन
– लिसनिंग
– क्रिएटिविटी
– प्लेफुलनेस

ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के 54वें पुण्य स्मृति दिवस पर पुष्पांजली कार्यक्रम आयोजित


पूर्व डीजीपी व सूचना आयोग के कमिश्नर सहित गणमान्य नागरिकों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
*24 जून, भोपाल (नीलबड़)।*
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 54वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया। नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन में आयोजित पुष्पांजली कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों सहित बीके भाई-बहनों ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए मम्मा के कार्यों को याद किया। 24 जून 1965 को मम्मा अपना पुराना शरीर छोड़ अव्यक्त हो गईंthe थीं।
कार्यक्रम में सुख-शांति भवन की डायरेक्टर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी नीता दीदी ने कहा कि मम्मा त्याग-तपस्या और प्रेम की साक्षात् मूरत थीं। आपका एक-एक कर्म अनुकरणीय और प्रेरणादाई था। आपकी सेवाभावना, लगन और तपस्या देखकर संस्थान के संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने आपको मुख्य प्रशासिका के रूप में बागडोर सौंपी। इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नियम व मर्यादाओं को स्थापित करने, उनका पालन करने में आप सबसे आगे रहीं। कैसी भी परिस्थिती आई पर आपने निडरता, साहस और धैर्यता के साथ सामना किया। मम्मा का जीवन वात्सल्य और ममतामयी स्नेह का मिसाल था। आप रात में 2 बजे से उठकर योग-साधना करतीं थीं। आपने अल्पायु में ही कठोर योग-साधना से इतना सक्षम बना लिया था कि आपके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति योग की शक्ति को महसूस करता था।
पूर्व डीजीपी व सूचना आयोग के कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि आज हम एक ऐसे महान व्यक्तित्व के पुण्य स्मृति दिवस कार्यक्रम में उपस्थित हुए हैं जिनका जीवन योग-साधना की एक मिसाल था। जिन्होंने मूल्य और आध्यात्म के नए कीर्तिमान स्थापित किए। ऐसी महान आत्मा को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। शारदा विहार स्कूल के डायरेक्टर अजय शिवहरे ने कहा कि मैं लंबे समय से ब्रहमाकुमारीज संस्थान से जुड़ा रहा हूं। यहां की शिक्षाओं से व्यक्ति का जीवन पूरी तरह से बदल जाता है।
नाटक से मम्मा का जीवन दर्शन दिखाया…
कार्यक्रम के दौरान बी के डाक्टर अंकिता मार्गदर्शन में छोटे- बच्चों व बालिकाओं ने मातेश्वरी जगदम्बा के जीवन से जुड़ी खास घटनाओं को नॄर्त नाटक के माध्यम से दर्शाया। समापन पर ब्रह्माभोजन का आयोजन किया गया। साथ ही सभी ने मम्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजली दी।
फोटो- कार्यक्रम में उपस्थित नगर के गणमान्य नागरिकगण व बीके भाई-बहनें।
फोटो- संबोधित करते हुए सुख-शांति भवन की डायरेक्टर राजयोगिनी बीके नीता दीदी।

ब्रह्मावत्सो द्वारा पौधा रोपण – विश्व पर्यावरण दिवस

नीलबड़ भोपाल , 5 जून 2019 –विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर पर्यावरण को शुद्ध एवम स्वछ बनायें रखने में अपना दायित्व  निभाते हुए आज सुख शांति भवन के प्रांगण में सभी ब्रहमवत्सो ने अपनी और से एक एक पौधा रोपण किया बाहरी वातावरण के साथ-साथ  आज  लोगो के मन का भी वातावरण अशुद्ध होता जा रहा है| इस बात को ध्यान  में रखते हुए सभी ब्रहमवत्सो ने संघठित रूप से प्रकर्ति के पांचों तत्वो को पवित्रता एवम शांति का दान दिया । साथ ही सभी ने मिल्कर प्रातिज्ञ भी की के सभी प्रकर्ति के प्रति अपने उत्तरदायित्व को ध्यान  में रखते एक पौधा अवश्य लगायेंगे और प्रकर्ति को शुद्ध बनाऐगे और सबमें इसके प्रति जागरूकता भी फैलाएँगे । अंत में सभी ने भवन के उद्यान में व्रक्षारोपन किया। सुख शांति भवन केंद्र की संचालिका बीके नीता दीदी ने  इस शुभ अवसर पर इस श्रेस्ठ कदम के लिए सभी को बधाई दी और साथ ही ईश्वरीए परिवार के और से आए हुए सभी आंगंतुकों को  एक एक पौदा  सौग़ात के रूप में दिया गया ।

‘Echo’ The inner voice विषय पर डॉक्टर्स के लिए सेमिनार

नीलबड़ भोपाल , 2 जून 2019 – समाज में अहम भूमिका निभाने वाले तथा समर्पित भाव से सेवाएँ दे रहे शहर के कुछ विशेष चिकित्सेकों के लिए ‘सुख शांति भवन’ में एक दिवसीय सेमिनार रखा गया जिसमे सभी चिकित्सकों ने अपना अपना अनुभव साझा करते हुए सबको inspire  किया तत्पश्चात विषय पर चर्चा करते हुए बीके रामकुमार भाई जी बताया कि  कैसे हमें  जीवन में वही मिलता हे  जो हम देते हैं । इस व्यवसाय में जो व्यक्ति आपके पास शारीरक तकलीफ लेकर आता वो वास्तव में मन में भी तकलीफ लेकर आता है । अगर दवाई के साथ हम अपने व्यवहार से शब्दो से उसके मानसिक दर्द को भी कम करते है तो मरीज पैसे के साथ दुयाएँ भी देकर जाता है जो हमारे जीवन में खुशियाँ लाता है । इसके साथ ही अन्य  वक्ताओ द्वारा आध्यात्मिक  ज्ञान कैसे लोगो के शारीरिक रोगो को दूर करने में मदद करता है बताया गया । अंत में आदरणीय नीता दीदी जी के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई । साथ ही सभी doctors को सम्मान के रूप में ईश्वरीए किताब एवं  पर्यावरण के प्रति जागरूक रहकर अपने उत्तरदायित्य को पूरा करने  हेतु एक तुलसी का पौधा भी  गिफ्ट दिया गया ।

सुख शांति भवन में -योग शिविर का शुभारम्भ

26 मई 2019 : अन्तराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में योग शिविर श्रंखला का शुभारम्भ , सुख शांति भवन नील बड  भोपाल से हुआ , नील बड निवासियों ने सम्मिलित होकर लाभ लिया

निशुल्क चिकित्सा जाँच शिविर – ब्रह्माकुमारीज भोपाल

सूरज नगर ,भोपाल 26 मई 2019 : समाज  सेवा के बिभिन्न क्षेत्रों  में सेवांए दे रही ब्रह्कुमारीज संस्था कि स्थानीय शाखा सुख शांति भवन नील बड भोपाल कि और से सूरज नगर में निशुल्क चिकित्सा जाँच शिविर का आयोजन किया गया जिसमे मुख्या रूप से शामिल हुए

डॉ.प्रियंका , डॉ.अंकिता, डॉ. हर्षिता , डॉ. ध्रुव ,डॉ.जय प्रकाश , डॉ.संजीव , बी के सोनम बहन ,मिताली बहन ,बी के अजय भाई

 

ब्रहमकुमारीज़ का राष्ट्रीय समाज सेवा अभियान पहुँचा-भोपाल

भोपाल 21 मई 2019: ब्रहमकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग द्वारा चलाया जा रहा “ राष्ट्रीय समाज सेवा अभियान” – खुशहाल जीवन एवम सुखी समाज”  जो 28 अप्रैल को जम्मू  से शुरू हो चुका है देश के विभन्न शहरो में होते हुए 16 जून 2019 को मुंबई में इस अभियान का समापन होगा आज 21 मई 2019 को यह अभियान    भोपाल पहुँचा जहां नवनिर्मित ध्यान सेंटर सुख शांति भवन में   अभियान के साथ चल रहे बीके भाई बहनो का स्वागत किया गया।      उसके बाद शहर में    जगह जगह खुशनुमा जीवन एवम सुखी समाज विषय पर कार्यक्रम आयोजित किए गए  । जिसमे मुख्य रूप से केंद्रीय जेल एवम  आर डी मेमोरियल ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट समेलित हैं  । अभियान के साथ चल रही बहनो ने बताया के कैसे खुशी ही स्वास्थ्य का मुख्य  आधार  है। जिसकी शुरुआत हमे खुद से करनी होगी  तथा  कैसे राजयोग ध्यान खुशनुमा जीवन बनाए   रखने में मदद करता है। कार्यक्रम की इसी श्रंखला  में विभिन्न क्षेत्रों  में कार्यरत समाज सेवियों के लिए सुख शांति भवन में भी एक कार्यक्रम का आयजन किया गया । केंद्र संचालिका आधारणीय बीके नीता दीदी के नेतृत्व मैं   इस कार्यक्रम में लगभग 100 समाज सेवियों ने हिस्सा लिया जिसमे मुख्य रूप से रोटरी एवम लाइंस क्लब के सदस्य शामिल थे कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बीके वंदना दीदी ने बताया के अगर हम समाज को स्वस्थ एवम सुखी देखना चाहते हैं तो परिवर्तन की शुरुआत खुद में करनी होगी जिसके लिए बहनो ने महव्त पूर्ण बिन्दु देते हुए सभी से इस अभियान की पहल करने की प्रतिज्ञा भी  कराई कार्यकृम में अल्पना मिश्रा (president rotary club), दीपाली गुप्ता(president महिला vishya society), Chandra lalchandani(president rotary club) विशेष रूप से पधारे। Chandra जी ने कार्यक्रम की सरहना करते हुए इस अभियान के लिए अपनी शुभकामनाये प्रशीत की अतिथियों को ईश्वरीय सौग़ात देकर कार्यक्रम का समपन्न किया गया ।

1 सुख शांति भवन                                                                                   

बी के वंदना दीदी मुंबई (मुख्य वक्ता )

बी के नीता दीदी -केंद्र संचालक

बी के ज्योति बहन -दिल्ली

बी के नीरू बहन -फरीदाबाद

बी के हेमा बहन

अतिथि

अल्पना मिश्रा (president rotary club)                                                                                                                                      Chandra lalchandani(president rotary club)

दीपाली गुप्ता(president महिला vaishya society),

 

2केंद्रीय जेल

बी के ज्योति बहन -दिल्ली

बी के साक्षी बहन

बी के पूनम बहन

बी के सुनील भाई फरीदाबाद

3 आर डी मेमोरियल ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूट

बी के वंदना दीदी

बी के मीना बहन