सिस्टर शिवानी द्वारा खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित



मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है ये मेरी च्वॉइस है: सिस्टर शिवानी
– खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम मिंटो हॉल में आयोजित
– अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर सिस्टर शिवानी दीदीजी ने बताए सफल-सुखमय जीवन के सूत्र
– शहरभर से बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकगण पहुंचे
20 सितंबर, भोपाल।
मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है, मुझे कैसा फील करना है, मेरी मानसिक स्थिति क्या है, कोई भी परिस्थिति मेरी मन की स्थिति को डिस्टर्ब तो नहीं करती… ये मेरी च्वॉइस है। हमारे जैसे संकल्प होंगे, वैसी वाणी होगी। जैसी वाणी होगी वैसे कर्म होंगे। जैसे कर्म होंगे वैसा हमारा, संस्कार (आदत) बन जाएगा…जो हमारे भाग्य का निर्माण करता है। हम अपना भाग्य कैसा बनाना चाहते हैं, ये हम पर निर्भर करता है। इसलिए मन में किसी भी संकल्प का चुनाव या क्रियेट करने के पहले सोचें। सोचने के पहले भी सोचें। क्या वह संकल्प मेरे लिए ठीक है।
यह सीख अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर, जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी दीदी ने दी। शुक्रवार को मिंटो हॉल में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन की ओर से खुशियां आपके द्वार विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली से पधारीं जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी ने संकल्प, कर्म, संस्कार, भाग्य और पारिवारिक संबंधों को मधुर बनाने के लिए अपने विचार व्यक्त करते हुए जीवन को सुखी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


नवरात्र नौ दिन की नहीं पूरा जीवन हो सात्विक और पवित्र…
उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में नवरात्र पर्व आने वाला है। नवरात्र में हम शक्ति का आह्नान करते हैं और नौ दिन जागरण, व्रत, सात्विकता और रास करते हैं। नवरात्र नौ दिन का नहीं हमारा पूरा जीवन ही नवरात्र की तरह शक्ति, मर्यादा, सात्विकता, रास (आनंदमय) हो। दैवी का आह्नान हमें अपने मन में करना है। जब मन में, संकल्प में दैवी गुणों का आह्नान करेंगे वैसे ही हमारे संस्कार बनते जाएंगे।

नवरात्र का इस तरह बताया महत्व…
1. जागरण- अपनी आत्मा को अज्ञान-अंधकार से जगाना है। उसे सदा पवित्र, शक्तिशाली संकल्प देकर अज्ञानता (व्यर्थ विचार, चिंता, दु:ख) से दूर रखना है।
2. व्रत- आज से ही ये व्रत लें कभी भी गुस्सा नहीं करेंगे। सदा शांत रहेंगे। सभी से प्रेमयुक्त व्यवहार करेंगे। सदा मर्यादाओं की लकीर के अंदर रहेंगे।
3. सात्विकता- हमारी लाइफ स्टाइल सात्विक हो। संकल्प में भी किसी को दु:ख देना मतलब हम सात्विक नहीं हैं। हमारे घर में जो धन आ रहा है वह ईमानदारी का हो। क्योंकि यदि घर में लूट, बेईमानी और गलत तरीके का धन आएगा और उससे जो घर में अनाज आएगा तो उसके बाइव्रेशन भी वैसे ही होंगे। यदि धन सात्विक है तो अनाज भी सात्विक रहेगा और जैसा अन्न खाएंगे, वैसा मन होगा। यदि किसी जीव को अपना भोजन बनाएंगे तो हमारे मन में भी डर, दु:ख, चिंता के बाइव्रेशन आएंगे। इसलिए भोजन शुद्ध और पवित्र हो।
4. रास- परमात्मा कहते हैं जो आत्मा अपनी डिग्निटी (मर्यादा) को इमर्ज करती है अर्थात् सदा मर्यादा की लकीर में रहती है वही रास कर सकती है। आनंद में रह सकती है।

दैवी की आठ भुजाएं अष्ठ शक्तियों का प्रतीक…
1. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति: व्यस्त होते हुए भी मन को सदा हल्का रखें। बिजी लाइफ पर इजी लाइफ हो।
2. समेटने की शक्ति: व्यर्थ विचारों से खुद को समेटकर मन को पॉजीटिव थॉट्स देना।
3. समाने की शक्ति: परिवार में एक-दूसरे की कमी-कमजोरियों को अपने अंदर समाने की आदत डालें फिर देखिए आपके घर में ही सतयुग आ जाएगा।
4. परखने की शक्ति: कोई भी कर्म करने के पहले उसके फायदे और नुकसान को परखना जरूरी है।
5. निर्णय करने की शक्ति: अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय खुद लें। क्योंकि आपसे बेहतर खुद को कोई और नहीं जान सकता है।
6. सामना करने की शक्ति: यदि मन शक्तिशाली है तो बाह्य चुनौतियों व परिस्थिति का सामना करने की शक्ति आ जाती है।
7. सहयोग की शक्ति: घर में एक-दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देकर ऊपर उठने में मदद करें। सबसे बड़ी संख्या किसी दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देना है।
8. सहन करने की शक्ति: रिश्तों में जितना सहन करेंगे, उतने मजबूत बनेंगे। लोगों के संस्कारों को सहन करना है। जहां अन्याय या गलत हो रहा उसका सामना करना चाहिए।

हमारा नेचर हो… अनकंडीशनल लव
उन्होंने कहा कि सामने वाले का व्यवहार और प्यार कैसा भी हो, परिस्थिति कैसी भी हो पर हमारा नेचर अनकंडीशनल लव का होना चाहिए। प्रेम आत्मा का स्वाभाविक गुण है। हम किसी को व्यवहार देखकर या परिस्थिति के हिसाब से किसी के साथ व्यवहार न करें। यदि हमने अपना नेचर सदा प्रेमयुक्त बनाने का संकल्प ले लिया तो सामने वाला भले कैसा व्यवहार करे हम प्रेमयुक्त व्यवहार ही करेंगे। यही हमारा व्यक्तित्व होता है। जब सामने वाला अपनी आदत को नहीं बदल सकता तो फिर हम क्यों अपनी अच्छी आदत, संस्कार या व्यवहार को बदलें।

सुबह उठते ही मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें…
उन्होंने कहा कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपने मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें। दो मिनट या पांच मिनट परमात्मा का ध्यान करें। हर दिन एक पॉजीटिव पॉवरफुल संकल्प लें कि मैं आज इसका पूरी तरह से पालन करुंगा। उसे दिन में बीच-बीच में दोहराते रहें, ताकि याद बना रहे। सुबह उठने के बाद एक घंटे तक मोबाइल और वॉट्सएप से दूर रहें। राजयोगी वही है जिसका अपने मन-वचन और कर्म पर नियंत्रण है। जो आत्मा खुद पर राज करती है वही राजयोगी है। राजयोग मेडिटेशन वह विधि है जिसके माध्यम से हम परमात्मा से अपना संबंध जोड़ते हैं। सुबह मेडिटेशन से परमात्मा से एनर्जी लेने पर हम सारा दिन अच्छे से वर्क कर सकते हैं।

माफ कर दें और माफी मांग लें…
उन्होंने कहा कि यदि हम इस जन्म के कड़े संस्कारों, बुरे अनुभव, घटनाओं को अगले जन्म में अपने साथ नहीं ले जाना चाहते हैं तो लोगों को माफ कर दें और उनसे मन ही मन माफी मांग लें। हमें लाइट या हल्के रहना है तो पुरानी बातें छोडऩा होगा। क्योंकि ज्यादा दिन तक पुरानी बातों को मन में रखने से आत्मा भारी होती है और मन की शक्ति कमजोर हो जाती है। हमने कल नाश्ते में क्या किया था ये ज्यादातर लोगों को याद नहीं होगा पर किसी ने एक बात दस साल पहले कही होगी तो वह आज भी याद होगी। पुरानी बातों को मन में रखकर चलना बोझा ढोने के समान है।

मन के दीपक को जलाएं, अंधेरा भाग जाएगा…
उन्होंने कहा कि दीपावली की तरह अपने मन के आंचल में ज्ञान का, पवित्रता और शुद्ध विचारों को दीप जलाएं तो अज्ञान का अंधकार भाग जाएगा। दीपावली में एक दीपक से हम हजारों दीपक को जला देते हैं, इसलिए आज से अपने घर का दीपक आप बनें। खुद की ज्योत को सदा पॉजीटिव संकल्पों से जलाएं रखेंगे तो परिवार के अन्य सदस्यों की ज्योत आपको देखकर ही जल जाएगी।

सिस्टर शिवानी ने खुशमय जीवन के ये सूत्र भी बताए….
– किसी को हम जो निर्णय देते हैं वह अपनी क्षमता से देते हैं, जबकि प्रत्येक आत्मा की क्षमता अपनी-अपनी है। किसी को हमने कोई सलाह दी और वह उसमें फैल हो गए तो कार्मिक एकाउंट बन जाता है। इसलिए सोच-समझकर ही किसी को सलाह देना चाहिए।
ृ- हम बाहर से मीठा बोल रहे हैं पर अंदर से हमारे विचार किसी के प्रति नेगेटिव हैं तो उस आत्मा तक नेगटिव बाइव्रेशन (प्रकम्पन) ही पहुंचेंगे। इसलिए हमारी कथनी और करनी एक समान हो।
– जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना, इससे हमारी एनर्जी बढऩे लगेगी।
– माता-पिता बच्चों की एनर्जी का डाउन कर देते हैं, एग्जाम की बोल-बोलकर। जबकि उनका हौसला बढ़ाएं, उन्हें हिम्मत दें। इससे एनर्जी बढ़ेगी।
– हमारा निर्णय, हमारा भाग्य लिखेंगे।
– एक-दूसरे को प्यार देंगे, सम्मान देंगे तो सतयुग आ जाएगा।
– आज चैक करें मेरी जीवन की कोई ऐसी आदत जिसे बदलने की जरूरत है।
– रिलेशनशिप में ज्यादा अचैटमेंट और अपेक्षाएं ही दु:ख का कारण बनती हैं।
– प्यार मतलब हमारी ओर से किसी को एनर्जी जाए तो वह पॉजीटिव हो।
– मेरी मन की स्थिति क्या है, कैसी रहनी चाहिए, मुझे कैसा फील करना है ये मुझ पर निर्भर है। मन में संकल्पों को क्रियेट करना ये हमारी च्वॉइस है।
– मेरा इस जन्म का कर्म, संस्कार ही साथ में जाता है।
– मन में जो भी गांठें बनी हैं उन्हें आज इसी हॉल में खोल दें, क्या पता कौन सा क्षण हमारा अंतिम क्षण हो और वह गांठें साथ चलीं जाएं।

ये रहे उपस्थित…
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके अवधेश दीदी, सुख-शांति भवन की डायरेक्टर बीके नीता दीदी सहित शहर से पधारे गणमान्य नागरिक, आईएएस, आईपीएस, जनप्रतिनिधि, डॉक्टर्स सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

नए संकल्प के साथ दो दिवसीय विहासा वर्कशॉप का समापन


अपने जीवन को वटवृक्ष की तरह विशाल बनाएं
– समापन पर सौ से अधिक डॉक्टर्स ने लिया अपने पेशे के साथ न्याय करने का संकल्प
– एक्टीविटीज से बताया विचारों और मेडिटेशन का महत्व
1 सितंबर, भोपाल।
अपना जीवन वटवृक्ष की तरह विशाल बनाएं। जितना बड़ा वटवृक्ष होता है उसकी जड़े उतनी ही गहराई तक जमीं और फैली होती हैं। साथ ही उसकी शाखाएं भी उतनी ही ज्यादा निकली होती हैं। हमारा जीवन वैल्यूज, पीस, पॉजीटीविटी, कम्पेशन, को-ऑपरेशन, वैल्यूंग यूवरसेल्फ, स्प्रीचुऑलिटी इन यूवरसेल्फ से परिपूर्ण और समृद्ध हो। क्योंकि डॉक्टर्स का पेशा हाईरिस्क प्रोफेशन है। हमारे अंदर जितनी इनर पॉवर, इनर वैल्यु होती हम उतने ज्यादा लोगों की मदद कर सकते हैं। आज मरीजों को दवा से ज्यादा हीलिंग पावर (दुआ, दया, करुणा, अपनापन) की जरूरत है। हमारा प्रेमपूर्ण और अपनेपन का व्यवहार मरीज को दर्द से बाहर निकलने में लिफ्ट का काम करते है।
यह बात माउंट आबू से पधारीं स्प्रीचुअल काउंसलर बीके कल्पना ने कही। ब्रह्ााकुमारीज संस्थान के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन में आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप का समापन रविवार को हो गया। वैल्यु इन हेल्थ केयर ए स्प्रीचुअल एप्रोच विषय पर आयोजित वर्कशॉप में शहर के सौ से अधिक डॉक्टर्स ने भाग लिया। इन दो दिन में अलग-अलग वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज मरीज को दवा से ज्यादा हीलिंग पावर की जरूरत है। बीके कल्पना ने कहा कि नियमित राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से हमारे अंदर शांति की शक्ति और माइंड पावर बढ़ती है। कई डॉक्टर्स का अनुभव है कि उन्होंने अपनी लाइफ में मेडिटेशन की प्रैक्टिस के बाद आतंरिक रूप से कई बदलाव महसूस किए हैं। अब उनसे मरीज पहले से ज्यादा संतुष्ट, खुश होकर अपने घर लौटते हैं।
विहासा टीम के को-ऑर्डिनेटर जेहनगिर हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट व फिजिशियन डॉ. मनोज मथनानी ने मनोवैज्ञानिक रीति से सभी से फॉर्म भरवाकर अलग-अलग प्रश्नों के माध्यम से सभी डॉक्टर्स से यह जानने की कोशिश की कि उन्हें किन परिस्थितयों में गुस्सा आता है, उनकी जीवन की कौन सी ऐसी गलती है जिसका मलाल आज भी उन्हें है। वह मरीजों को कैसे अटेंड करते हैं। परिवार और प्रोफेशन में कैसे मैनेज करते हैं। साथ ही विभिन्ना सवालों से आए आंसर के बाद उन्होंने सभी को बेहतर जवाब दिया। इस दौरान नई दिल्ली से मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रीना तोमर, माउंट आबू से ग्लोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की फिजियोशोथैरेपिस्ट डॉ. हेमलता पीटी, फॉरेन बैंक इन गुरुग्राम की एचआर हैड बीके प्रभा शर्मा, दिल्ली से राजयोग मेडिटेशन टीचर बीके दिव्या ने सभी को मोटिवेट करते हुए स्प्रीचुअलिटी का महत्व बताया।

इन सात विषयों पर किया फोकस
मूल्य- मूल्य एक दूसरे से जुड़े होते हैं। यदि हमारे जीवन में एक मूल्य आता है तो दूसरा अपना आप आ जाता है। अपने प्रोफेशन में मूल्यों को वरीयता देते हुए कार्य करें
पीस- शांति को शक्ति कहा जाता है। प्रत्येक मनुष्य का उद्देश्य ही जीवन में सुख-शांति होता है। अपने फैमिली मेंबर, स्टाफ, मरीज के साथ शांतिपूर्ण व्यवहार करें। कुछ ही दिनों में आप बदलाव महसूस करेंगे।
पॉजीटीविटी- सकारात्मक चिंतन से विचारों में चहां रचनात्मकता बढ़ती है वहीं विचार शक्तिशाली होते हैं। ये सबसे बड़ा टूल है।
कम्पेशन- मरीज के प्रति दया, रहम और अपनेपन का भाव हो। वह जल्दी ठीक होगा।
को-ऑपरेशन- अपनी टीम के साथ समन्वय बनाकर और सामंजस्य बनाकर चलें।
वैल्यूंग यूवरसेल्फ- नकारात्मक विचारों से स्वयं की रक्षा करना जरूरी है।
स्प्रीचुऑलिटी इन यूवरसेल्फ- स्प्रीचुऑलिटी से हमारी इनर पावर बढ़ती है। जो हमारे प्रोफेशन में हीलिंग करने में मदद करती है।

फोटो- वर्कशॉप में तीन ग्रुप बनाकर अलग-अलग एक्टीविटीज कराईं गईं

ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के 54वें पुण्य स्मृति दिवस पर पुष्पांजली कार्यक्रम आयोजित


पूर्व डीजीपी व सूचना आयोग के कमिश्नर सहित गणमान्य नागरिकों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
*24 जून, भोपाल (नीलबड़)।*
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 54वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया। नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन में आयोजित पुष्पांजली कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों सहित बीके भाई-बहनों ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए मम्मा के कार्यों को याद किया। 24 जून 1965 को मम्मा अपना पुराना शरीर छोड़ अव्यक्त हो गईंthe थीं।
कार्यक्रम में सुख-शांति भवन की डायरेक्टर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी नीता दीदी ने कहा कि मम्मा त्याग-तपस्या और प्रेम की साक्षात् मूरत थीं। आपका एक-एक कर्म अनुकरणीय और प्रेरणादाई था। आपकी सेवाभावना, लगन और तपस्या देखकर संस्थान के संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने आपको मुख्य प्रशासिका के रूप में बागडोर सौंपी। इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नियम व मर्यादाओं को स्थापित करने, उनका पालन करने में आप सबसे आगे रहीं। कैसी भी परिस्थिती आई पर आपने निडरता, साहस और धैर्यता के साथ सामना किया। मम्मा का जीवन वात्सल्य और ममतामयी स्नेह का मिसाल था। आप रात में 2 बजे से उठकर योग-साधना करतीं थीं। आपने अल्पायु में ही कठोर योग-साधना से इतना सक्षम बना लिया था कि आपके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति योग की शक्ति को महसूस करता था।
पूर्व डीजीपी व सूचना आयोग के कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि आज हम एक ऐसे महान व्यक्तित्व के पुण्य स्मृति दिवस कार्यक्रम में उपस्थित हुए हैं जिनका जीवन योग-साधना की एक मिसाल था। जिन्होंने मूल्य और आध्यात्म के नए कीर्तिमान स्थापित किए। ऐसी महान आत्मा को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। शारदा विहार स्कूल के डायरेक्टर अजय शिवहरे ने कहा कि मैं लंबे समय से ब्रहमाकुमारीज संस्थान से जुड़ा रहा हूं। यहां की शिक्षाओं से व्यक्ति का जीवन पूरी तरह से बदल जाता है।
नाटक से मम्मा का जीवन दर्शन दिखाया…
कार्यक्रम के दौरान बी के डाक्टर अंकिता मार्गदर्शन में छोटे- बच्चों व बालिकाओं ने मातेश्वरी जगदम्बा के जीवन से जुड़ी खास घटनाओं को नॄर्त नाटक के माध्यम से दर्शाया। समापन पर ब्रह्माभोजन का आयोजन किया गया। साथ ही सभी ने मम्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजली दी।
फोटो- कार्यक्रम में उपस्थित नगर के गणमान्य नागरिकगण व बीके भाई-बहनें।
फोटो- संबोधित करते हुए सुख-शांति भवन की डायरेक्टर राजयोगिनी बीके नीता दीदी।

‘Echo’ The inner voice विषय पर डॉक्टर्स के लिए सेमिनार

नीलबड़ भोपाल , 2 जून 2019 – समाज में अहम भूमिका निभाने वाले तथा समर्पित भाव से सेवाएँ दे रहे शहर के कुछ विशेष चिकित्सेकों के लिए ‘सुख शांति भवन’ में एक दिवसीय सेमिनार रखा गया जिसमे सभी चिकित्सकों ने अपना अपना अनुभव साझा करते हुए सबको inspire  किया तत्पश्चात विषय पर चर्चा करते हुए बीके रामकुमार भाई जी बताया कि  कैसे हमें  जीवन में वही मिलता हे  जो हम देते हैं । इस व्यवसाय में जो व्यक्ति आपके पास शारीरक तकलीफ लेकर आता वो वास्तव में मन में भी तकलीफ लेकर आता है । अगर दवाई के साथ हम अपने व्यवहार से शब्दो से उसके मानसिक दर्द को भी कम करते है तो मरीज पैसे के साथ दुयाएँ भी देकर जाता है जो हमारे जीवन में खुशियाँ लाता है । इसके साथ ही अन्य  वक्ताओ द्वारा आध्यात्मिक  ज्ञान कैसे लोगो के शारीरिक रोगो को दूर करने में मदद करता है बताया गया । अंत में आदरणीय नीता दीदी जी के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई । साथ ही सभी doctors को सम्मान के रूप में ईश्वरीए किताब एवं  पर्यावरण के प्रति जागरूक रहकर अपने उत्तरदायित्य को पूरा करने  हेतु एक तुलसी का पौधा भी  गिफ्ट दिया गया ।

‘’ The Purpose of life” विषय पर एक दिवसीय सेमीनार

 

नीलबड भोपाल 12 अप्रेल 2019 : निराश और हतास हो चुके मन में ,उम्मीद की नई किरण जगाने एवं उमंग उत्साह भरने के, ब्रह्माकुमारीज के इस ईश्वरीय कार्य में, ब्रह्माकुमारीज “सुख शांति भवन” नीलबड भोपाल एक सराहनीय भूमिका निभा रहा है, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए निकट भविष्य में सेवा निवृत होने वाले “बैंक ऑफ़ बड़ोदा” के अधिकारियो के लिए ‘’ Finding The Purpose of Life”  विषय पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया, जिसमें ब्रह्माकुमारी बहनों ने ख़ुशी को जीवन का मूल उद्देश्य बताया तथा ख़ुशी को अपने जीवन में बनाये रखने तथा दूसरो को ख़ुशी बांटने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दिए | विशेष अतिथि के रूप में पधारे श्री ओ.पी.गुनानी जी (जोनल हेड ऑफ़ यूके बैंक) ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान खिचवाया, कि अधिकतर सेवा निवृत बैंक कर्मचारियो का जीवन, जीने की कोई नई वजह न मिलने क कारण निराशा पूर्ण हो जाता है, जिससे वह कभी-कभी किसी गंभीर बिमारी का शिकार भी  हो जाते है, ख़ुशी गुम हो जाती है , जीवन की अंतिम घड़िया जीवन को नये परिप्रेक्ष से समझ उसके वास्तविक उद्देश्य को समझना होता है जिससे जीवन जीने की सही वजह व ख़ुशी मिल जाए |

राजयोगिनी नीता दीदी जी के निर्देशन में “सुख शांति भवन” इस ईश्वरीय सेवा को बखूबी निभा रहा है |

इस सेमिनार में सम्मिलित हुए बैंक अधिकारियो को भी स्वयं की वा परमात्मा की सत्य पहचान बताकर जीवन के सही उद्देश्य को बताया गया , परमात्मा से जीवन की सच्ची शांति और ख़ुशी प्राप्त करने की विधि “ राजयोग ध्यान” पर भी  विस्तार से चर्चा हुई तथा ध्यान के द्वारा शांति अनुभूति  कराकर कार्यक्रम का समापन किया गया

कार्यक्रम के विशेष अतिथि

श्री ओ. पी. गुनानी जी (डिप्टी जोनल हेड ऑफ़ यूको बैंक )

एल. एन . आर्या जी (सीनियर मेनेजर ऑफ़ केनरा बैंक)

राजयोगिनी बी. के. आराधना दीदी

राजयोगिनी बी के सुंदरी दीदी

राजयोगिनी बी. के. उर्मी दीदी

मुख्या वक्ता

बी.के.हेमा,

बी.के.साक्षी

बी.के.सरला,

बी.के.प्रियंका

 

A session on “Art Of Living” At Bhopal Airport CISF

Bhopal,26 jan 2019:-  मुबई से पधारी राज्योनी बी के कमलेश दीदी जी ने भोपाल एअरपोर्ट स्थित CISF ऑफिसर्स एवं जवानों के लिए “आर्ट ऑफ़ लिविंग फॉर हैप्पी लाइफ ” विषय पर चर्चा करते हुए जीवन की हर परिस्थिति में खुश रहने की कला सिखाई

“सुख शांति” भवन में मनाया गया 70वां गणतंत्र दिवस

 

भोपाल ,26 जनवरी2019 ; ब्रह्माकुमारीज द्वारा ,पूजा कॉलोनी नीलवड भोपाल में नवनिर्मित सुख शांति भवन में 70 वा गणतंत्र दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया गया ,इस सुअवसर  सुख शांति भवन की निदेशिका राजयोगिनी बी के नीता दीदी एवं विशिष्ठ अतिथि के रूप में पधारे बरिष्ठ अधिवक्ता महेश साहू लायन (महासचिव म प्र कांग्रेश कमेटी ) के द्वारा तिरंगा झंडा फहराया गया ,तथा उपस्थिति सभी भाई बहनों ने झंडे के नीचे खड़े होकर राष्ट्रगान के साथ तिरंगे एवं राष्ट्र के  प्रति अपना सम्मान प्रकट किया उपस्थित अतिथि महेश साहू जी ने गणतंत्र दिवस की सभी को  बधाई दी तथा ब्रह्मकुमारीज के श्रेष्ठ कार्यो की सराहना करते हुए अपनी सुभकामनाये प्रकट की , नीता दीदी ने भी सभी को बधाई देते हुए सभी को ईश्वरीय नियम एवं ईश्वरीय संविधान पर चलकर जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए प्रेरित किया

 

श्री गणेश की अदभुत कहानी – ब्रह्माकुमारीज़ की जुबानी

 

श्री गणेश की अदभुत कहानी ब्रह्माकुमारीज़ की जुबानी

(ब्रह्माकुमारीज़  द्वारा श्री गणेश के स्वरुप का आध्यात्मिक महत्व)

भोपाल 20 सितंबर 2018

 विश्व गुरु भारत के नाम से प्रसिद्ध भारत की संस्कृति दुनिया के लिए एक आकर्षण का केंद्र रही है वास्तव में इस संस्कृति की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि के कारण ही इसे अध्यात्मिक गुरु अथवा विश्व गुरु का दर्जा दिया गया है , जिसने दुनिया की सोच को एक नई दिशा दी है |

 यहां के त्यौहार यहाँ की  संस्कृति की विशेषता हे   जिससे लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं इन त्योहारों के पीछे भी वास्तव में जीवन के गहरे सिद्धांत छिपे हैं, परंतु समय के साथ लोग इनके आध्यात्मिक रहस्य को भूल गए और वह मात्र परंपराएं बनकर रह गए , इसी संदर्भ में ब्रह्माकुमारीज़  ने एक विशेष प्रयास की शुरुआत की जिसके अंतर्गत इन त्योहारों के पीछे छिपे हुए आध्यात्मिक रहस्य को जन-जन तक पहुंचाने की पहल की  इसी कड़ी में हाल ही में मनाए गए गणेश उत्सव के अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने अनेक स्थानों पर जाकर गणेश की प्रतिमा के सामने एकत्रित भाई बहनों को श्री गणेश का प्रेरणादाई आध्यात्मिक रहस्य बताया |

श्री गणेश  के विचित्र चित्र की अदभुत कहानी सुनाई , विशेष गुण और शक्ति का प्रतीक हर अंग और अलंकर  के बारे में बताया , श्री गणेश ने भी यह गुण और शक्तियां परमात्मा से प्राप्त की और विघ्न विनाशक कहलाए ,  बहनों ने आगे बताया कि कैसे हम भी परमात्मा से संबंध बनाकर उन गुणों और शक्तियों को अपने अंदर धारण कर सकते हैं और अपने जीवन के विघनों के  ऊपर विजय पा सकते हैं और अपने जीवन  पर विजय पा सकते हैं |

परमात्मा से कैसे हम इन गुणों और शक्तियों को अपने अंदर धारण करें उसके लिए ब्रह्माकुमारी बहनों ने ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर चल रहे सात दिवसीय राजयोग ध्यान के कोर्स के लिए सभी को प्रेरित करते हुए आमंत्रित किया, यह कोर्स निशुल्क कराया जाता है |  

 

 

कृष्ण के साथ रास कर मनाई गई कृष्ण जन्माष्टमी

 

3 सितम्बर 2018 नीलबड

पूजा कॉलोनी नीलबड भोपाल में स्थित ब्रह्माकुमारिज़ का नवनिर्मित भवन “ दिव्यप्रकाश भवन ” में इस वर्ष की कृष्ण जन्माष्टमी बड़ी भव्यता के साथ मनाई गयी | मंच का संचालन बी. के. रामकुमार भाई ने किया | ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के लगभग 200 भाई बहनों ने उपस्थित होकर उत्सव का आनंद उठाया |

इस कृष्ण जन्माष्टमी में एक विशेष दृश्य देखने को मिला , सब भाई बहनों ने मोर मुकुट धारण कर स्वर्ग की सैर की तथा श्री कृष्ण के साथ रास भी किया |

अनुभूतियों का ये सफ़र, कमेंट्री की सहयता से बी के पूनम के निर्देशन में संपन्न हुआ |

विशेष अतिथि के रूप में पधारे आर. डी. मेमोरियल कॉलेज के चेयरमेन आदरणीय भ्राता “श्री हेमंत सिंह चौहान जी” ने उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढाई एवं एक गीत के माध्यम से श्री कृष्ण के प्रति अपने भाव भी प्रकट किये |

अंत में कार्यक्रम की संयोजिका एवं स्थानीय सेवाकेंद्र की प्रबंधक आदरणीय राजयोगिनी नीता दीदी जी ने माखन मिश्री से सबका मुख मीठा कराकर कार्यक्रम का समापन किया |

अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ का योग जागरूकता अभियान

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भोपाल, ईदगाह हिल्स 21 जून 2018

अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा चलाये जा रहे योग जागरूकता अभियान के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज़ ने अनेक स्थानों पर योग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया |

सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका , ब्रह्माकुमारी नीता दीदी जी के नेतृत्व में ब्रह्माकुमारीज़ भोपाल की स्थानीय शाखा ईदगाह हिल्स , जवाहर चौक , श्यामला हिल्स एवम् पंचवटी सेवा केंद्र द्वारा 21 मई से 21 जून के अंतर्गत , एन एच डी सी लिमिटेड .  सागर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूट, दूरदर्शन केंद्र, एम्स (आल इंडिया इंस्टीटूट ऑफ़ मेडिकल साइंस ) , कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय , मित्तल इंस्टीटूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, एवं 25 वी पुलिस बटालियन, अनेक स्थानों पर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया |

योग जागरूकता कार्यक्रम में सम्पूर्ण स्वास्थ्य के अंतर्गत ना केवल शारीरिक स्वास्थ्य अपितु मानसिक एवम् सामाजिक स्वास्थ्य को भी शामिल किया गया है एवं सम्पूर्ण स्वस्थ्य का आधार अध्यात्मिक स्वास्थ्य को बताया गया |

बी.के.अमित भाई ने शारीरिक व्यायाम , योगासनों , प्राणायाम एवं मुद्राओ का लाभ बताते हुए प्रशिक्षण दिया एवं डॉ. संजीव भाई एवं डॉ. ध्रुव भाई ने शरीर को स्वस्थ्य रखने हेतु जीवन में सही आहार , व्यायाम एवं आराम के विषय में बताते हुए अपनी दिनचर्या को सात्विक एवं संतुलित बनाने पर प्रकाश डाला |

 बीके रामकुमार भाई , बीके. हेमा, बीके पूनम, बीके सोनम एवं बीके साक्षी ने सम्पूर्ण स्वास्थ्य हेतु अध्यात्मिकता के विशेष योगदान पर प्रकाश डाला, एवं योग का अर्थ स्पष्ट करके बताया कि योग का वास्तविक अर्थ है जोड़ ,

आत्मा परमात्मा का मिलन ही सच्चे अर्थो में योग है , यही राजयोग की सच्ची विधि है जो हमारे मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न कर मानसिक और शारिरीक रोगों से मुक्ति दिलाते है,

साथ ही साथ राजयोग हमारे सामाजिक संबंधो को भी मधुर बनाता है |

अंत में बीके बहनों ने राजयोग मैडिटेशन का अभ्यास कराकर कार्यक्रम का समापन किया |

Sagar Group Of Institution

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25th Battalion Police line Bhopal

Doordarshan kendra Bhopal

AIIMS, Bhopal

Mittal Institute Of Technology

NHDC Ltd

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