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सिस्टर शिवानी द्वारा खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित

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मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है ये मेरी च्वॉइस है: सिस्टर शिवानी
– खुशियां आपके द्वार कार्यक्रम मिंटो हॉल में आयोजित
– अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर सिस्टर शिवानी दीदीजी ने बताए सफल-सुखमय जीवन के सूत्र
– शहरभर से बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकगण पहुंचे
20 सितंबर, भोपाल।
मन में कैसे संकल्पों को क्रियेट करना है, मुझे कैसा फील करना है, मेरी मानसिक स्थिति क्या है, कोई भी परिस्थिति मेरी मन की स्थिति को डिस्टर्ब तो नहीं करती… ये मेरी च्वॉइस है। हमारे जैसे संकल्प होंगे, वैसी वाणी होगी। जैसी वाणी होगी वैसे कर्म होंगे। जैसे कर्म होंगे वैसा हमारा, संस्कार (आदत) बन जाएगा…जो हमारे भाग्य का निर्माण करता है। हम अपना भाग्य कैसा बनाना चाहते हैं, ये हम पर निर्भर करता है। इसलिए मन में किसी भी संकल्प का चुनाव या क्रियेट करने के पहले सोचें। सोचने के पहले भी सोचें। क्या वह संकल्प मेरे लिए ठीक है।
यह सीख अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर, जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी दीदी ने दी। शुक्रवार को मिंटो हॉल में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के नीलबड़ स्थित सुख-शांति भवन की ओर से खुशियां आपके द्वार विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली से पधारीं जीवन प्रबंधन विशेषज्ञ सिस्टर शिवानी ने संकल्प, कर्म, संस्कार, भाग्य और पारिवारिक संबंधों को मधुर बनाने के लिए अपने विचार व्यक्त करते हुए जीवन को सुखी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


नवरात्र नौ दिन की नहीं पूरा जीवन हो सात्विक और पवित्र…
उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में नवरात्र पर्व आने वाला है। नवरात्र में हम शक्ति का आह्नान करते हैं और नौ दिन जागरण, व्रत, सात्विकता और रास करते हैं। नवरात्र नौ दिन का नहीं हमारा पूरा जीवन ही नवरात्र की तरह शक्ति, मर्यादा, सात्विकता, रास (आनंदमय) हो। दैवी का आह्नान हमें अपने मन में करना है। जब मन में, संकल्प में दैवी गुणों का आह्नान करेंगे वैसे ही हमारे संस्कार बनते जाएंगे।

नवरात्र का इस तरह बताया महत्व…
1. जागरण- अपनी आत्मा को अज्ञान-अंधकार से जगाना है। उसे सदा पवित्र, शक्तिशाली संकल्प देकर अज्ञानता (व्यर्थ विचार, चिंता, दु:ख) से दूर रखना है।
2. व्रत- आज से ही ये व्रत लें कभी भी गुस्सा नहीं करेंगे। सदा शांत रहेंगे। सभी से प्रेमयुक्त व्यवहार करेंगे। सदा मर्यादाओं की लकीर के अंदर रहेंगे।
3. सात्विकता- हमारी लाइफ स्टाइल सात्विक हो। संकल्प में भी किसी को दु:ख देना मतलब हम सात्विक नहीं हैं। हमारे घर में जो धन आ रहा है वह ईमानदारी का हो। क्योंकि यदि घर में लूट, बेईमानी और गलत तरीके का धन आएगा और उससे जो घर में अनाज आएगा तो उसके बाइव्रेशन भी वैसे ही होंगे। यदि धन सात्विक है तो अनाज भी सात्विक रहेगा और जैसा अन्न खाएंगे, वैसा मन होगा। यदि किसी जीव को अपना भोजन बनाएंगे तो हमारे मन में भी डर, दु:ख, चिंता के बाइव्रेशन आएंगे। इसलिए भोजन शुद्ध और पवित्र हो।
4. रास- परमात्मा कहते हैं जो आत्मा अपनी डिग्निटी (मर्यादा) को इमर्ज करती है अर्थात् सदा मर्यादा की लकीर में रहती है वही रास कर सकती है। आनंद में रह सकती है।

दैवी की आठ भुजाएं अष्ठ शक्तियों का प्रतीक…
1. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति: व्यस्त होते हुए भी मन को सदा हल्का रखें। बिजी लाइफ पर इजी लाइफ हो।
2. समेटने की शक्ति: व्यर्थ विचारों से खुद को समेटकर मन को पॉजीटिव थॉट्स देना।
3. समाने की शक्ति: परिवार में एक-दूसरे की कमी-कमजोरियों को अपने अंदर समाने की आदत डालें फिर देखिए आपके घर में ही सतयुग आ जाएगा।
4. परखने की शक्ति: कोई भी कर्म करने के पहले उसके फायदे और नुकसान को परखना जरूरी है।
5. निर्णय करने की शक्ति: अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय खुद लें। क्योंकि आपसे बेहतर खुद को कोई और नहीं जान सकता है।
6. सामना करने की शक्ति: यदि मन शक्तिशाली है तो बाह्य चुनौतियों व परिस्थिति का सामना करने की शक्ति आ जाती है।
7. सहयोग की शक्ति: घर में एक-दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देकर ऊपर उठने में मदद करें। सबसे बड़ी संख्या किसी दूसरे को पॉजीटिव बाइव्रेशन देना है।
8. सहन करने की शक्ति: रिश्तों में जितना सहन करेंगे, उतने मजबूत बनेंगे। लोगों के संस्कारों को सहन करना है। जहां अन्याय या गलत हो रहा उसका सामना करना चाहिए।

हमारा नेचर हो… अनकंडीशनल लव
उन्होंने कहा कि सामने वाले का व्यवहार और प्यार कैसा भी हो, परिस्थिति कैसी भी हो पर हमारा नेचर अनकंडीशनल लव का होना चाहिए। प्रेम आत्मा का स्वाभाविक गुण है। हम किसी को व्यवहार देखकर या परिस्थिति के हिसाब से किसी के साथ व्यवहार न करें। यदि हमने अपना नेचर सदा प्रेमयुक्त बनाने का संकल्प ले लिया तो सामने वाला भले कैसा व्यवहार करे हम प्रेमयुक्त व्यवहार ही करेंगे। यही हमारा व्यक्तित्व होता है। जब सामने वाला अपनी आदत को नहीं बदल सकता तो फिर हम क्यों अपनी अच्छी आदत, संस्कार या व्यवहार को बदलें।

सुबह उठते ही मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें…
उन्होंने कहा कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपने मन में पॉवरफुल थॉट्स क्रियेट करें। दो मिनट या पांच मिनट परमात्मा का ध्यान करें। हर दिन एक पॉजीटिव पॉवरफुल संकल्प लें कि मैं आज इसका पूरी तरह से पालन करुंगा। उसे दिन में बीच-बीच में दोहराते रहें, ताकि याद बना रहे। सुबह उठने के बाद एक घंटे तक मोबाइल और वॉट्सएप से दूर रहें। राजयोगी वही है जिसका अपने मन-वचन और कर्म पर नियंत्रण है। जो आत्मा खुद पर राज करती है वही राजयोगी है। राजयोग मेडिटेशन वह विधि है जिसके माध्यम से हम परमात्मा से अपना संबंध जोड़ते हैं। सुबह मेडिटेशन से परमात्मा से एनर्जी लेने पर हम सारा दिन अच्छे से वर्क कर सकते हैं।

माफ कर दें और माफी मांग लें…
उन्होंने कहा कि यदि हम इस जन्म के कड़े संस्कारों, बुरे अनुभव, घटनाओं को अगले जन्म में अपने साथ नहीं ले जाना चाहते हैं तो लोगों को माफ कर दें और उनसे मन ही मन माफी मांग लें। हमें लाइट या हल्के रहना है तो पुरानी बातें छोडऩा होगा। क्योंकि ज्यादा दिन तक पुरानी बातों को मन में रखने से आत्मा भारी होती है और मन की शक्ति कमजोर हो जाती है। हमने कल नाश्ते में क्या किया था ये ज्यादातर लोगों को याद नहीं होगा पर किसी ने एक बात दस साल पहले कही होगी तो वह आज भी याद होगी। पुरानी बातों को मन में रखकर चलना बोझा ढोने के समान है।

मन के दीपक को जलाएं, अंधेरा भाग जाएगा…
उन्होंने कहा कि दीपावली की तरह अपने मन के आंचल में ज्ञान का, पवित्रता और शुद्ध विचारों को दीप जलाएं तो अज्ञान का अंधकार भाग जाएगा। दीपावली में एक दीपक से हम हजारों दीपक को जला देते हैं, इसलिए आज से अपने घर का दीपक आप बनें। खुद की ज्योत को सदा पॉजीटिव संकल्पों से जलाएं रखेंगे तो परिवार के अन्य सदस्यों की ज्योत आपको देखकर ही जल जाएगी।

सिस्टर शिवानी ने खुशमय जीवन के ये सूत्र भी बताए….
– किसी को हम जो निर्णय देते हैं वह अपनी क्षमता से देते हैं, जबकि प्रत्येक आत्मा की क्षमता अपनी-अपनी है। किसी को हमने कोई सलाह दी और वह उसमें फैल हो गए तो कार्मिक एकाउंट बन जाता है। इसलिए सोच-समझकर ही किसी को सलाह देना चाहिए।
ृ- हम बाहर से मीठा बोल रहे हैं पर अंदर से हमारे विचार किसी के प्रति नेगेटिव हैं तो उस आत्मा तक नेगटिव बाइव्रेशन (प्रकम्पन) ही पहुंचेंगे। इसलिए हमारी कथनी और करनी एक समान हो।
– जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना, इससे हमारी एनर्जी बढऩे लगेगी।
– माता-पिता बच्चों की एनर्जी का डाउन कर देते हैं, एग्जाम की बोल-बोलकर। जबकि उनका हौसला बढ़ाएं, उन्हें हिम्मत दें। इससे एनर्जी बढ़ेगी।
– हमारा निर्णय, हमारा भाग्य लिखेंगे।
– एक-दूसरे को प्यार देंगे, सम्मान देंगे तो सतयुग आ जाएगा।
– आज चैक करें मेरी जीवन की कोई ऐसी आदत जिसे बदलने की जरूरत है।
– रिलेशनशिप में ज्यादा अचैटमेंट और अपेक्षाएं ही दु:ख का कारण बनती हैं।
– प्यार मतलब हमारी ओर से किसी को एनर्जी जाए तो वह पॉजीटिव हो।
– मेरी मन की स्थिति क्या है, कैसी रहनी चाहिए, मुझे कैसा फील करना है ये मुझ पर निर्भर है। मन में संकल्पों को क्रियेट करना ये हमारी च्वॉइस है।
– मेरा इस जन्म का कर्म, संस्कार ही साथ में जाता है।
– मन में जो भी गांठें बनी हैं उन्हें आज इसी हॉल में खोल दें, क्या पता कौन सा क्षण हमारा अंतिम क्षण हो और वह गांठें साथ चलीं जाएं।

ये रहे उपस्थित…
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके अवधेश दीदी, सुख-शांति भवन की डायरेक्टर बीके नीता दीदी सहित शहर से पधारे गणमान्य नागरिक, आईएएस, आईपीएस, जनप्रतिनिधि, डॉक्टर्स सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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Launching of 10 Crore Addiction-Free Pledge Mega Campaign

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मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने किया “10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान” का राज्य स्तरीय शुभारंभप

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने किया “10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान” का राज्य स्तरीय शुभारंभ
भोपाल, 2 अगस्त
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के राजयोग भवन अरेरा कॉलोनी द्वारा रविवार को “10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान” का राज्य स्तरीय शुभारंभ नीलबड़ स्थित सुख शांति भवन मेडिटेशन रिट्रीट सेंटर के अनुभूति सभागार में, मध्यप्रदेश के *माननीय राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल* के मुख्य आतिथ्य में  संपन्न हुआ। कार्यक्रम में *मध्यप्रदेश शासन के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष श्री अवधेश प्रताप सिंह, ब्रह्माकुमारीज़ की वरिष्ठ राजयोगिनी बीके नीता दीदी, सीहोर से पधारी बीके पंचशीला दीदी, मुरैना से पधारी बीके रेखा दीदी, बीके आराधना बहन* सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं राष्ट्रगान से हुआ।
*अपने प्रेरक उद्बोधन में माननीय राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल* जी ने कहा कि नशे की समस्या का स्थायी समाधान केवल दंड या उपचार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का विकास है। जब व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानता है और जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाता है, तब उसके भीतर आत्मबल, विवेक और सही निर्णय लेने की शक्ति स्वतः विकसित होती है।  उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान की सेवाओं की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि संस्था वर्षों से समाज में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, महिला सशक्तिकरण, आध्यात्मिक जागृति तथा नशामुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि आज आवश्यकता ऐसे अभियानों की है जो केवल संदेश न दें, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान” देश में जनजागरण का एक ऐतिहासिक अभियान सिद्ध होगा तथा इसमें ब्रह्माकुमारी संस्थान की भूमिका अत्यंत प्रेरणादायी रहेगी।

*सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह* ने कहा कि नशामुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा, जब शासन और समाज मिलकर इस दिशा में कार्य करेंगे। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे जनजागरण अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान लाखों युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगा।
*राजयोग भवन अरेरा कॉलोनी प्रभारी, वरिष्ठ राजयोगिनी बीके नीता दीदी जी*  ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि आज का समय केवल भौतिक प्रगति का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागृति का भी है। समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, तनाव और पारिवारिक विघटन का स्थायी समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि आत्मजागृति और संस्कारों से संभव है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान वर्षों से राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से व्यक्ति, परिवार और समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहा है और यह अभियान उसी सेवा यात्रा का महत्वपूर्ण चरण है।
 *मुरैना से पधारी वरिष्ठ राजयोगिनी बीके रेखा बहन* ने कहा कि किसी भी प्रकार का नशा व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। यह धीरे-धीरे उसके मनोबल, बुद्धिबल और निर्णय क्षमता को क्षीण कर देता है। मनुष्य क्षणिक आनंद की तलाश में नशे की ओर आकर्षित होता है, लेकिन वही आनंद आगे चलकर उसके जीवन का सबसे बड़ा बंधन बन जाता है। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य के पास सुविधाएं और साधन पहले से कहीं अधिक हैं, लेकिन मन की शांति लगातार कम होती जा रही है। यदि प्रतिदिन कुछ समय स्वयं के लिए निकालकर राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास किया जाए, तो व्यक्ति भीतर से शक्तिशाली बनता है और किसी भी प्रकार के व्यसन से सहज ही दूर रह सकता है।
*सीहोर से पधारी वरिष्ठ राजयोगिनी पंचशिला दीदी* जी ने कहा कि आज का सबसे बड़ा संकट संसाधनों का नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति का है। जब मनुष्य स्वयं से दूर हो जाता है, तभी तनाव, अवसाद, क्रोध और नशे जैसी बुराइयाँ उसके जीवन में प्रवेश करती हैं। उन्होंने कहा कि अध्यात्म व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है और राजयोग मेडिटेशन उसे भीतर से इतना सशक्त बना देता है कि वह किसी भी प्रकार के व्यसन पर सहज विजय प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय आत्मचिंतन और परमात्म स्मृति में लगाए, तो न केवल उसका जीवन बदलेगा, बल्कि परिवार और समाज भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगा।
इसके पश्चात *बीके आराधना बहन ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं नागरिकों को राष्ट्रीय नशामुक्ति प्रतिज्ञा* दिलाई तथा *बीके हेमा बहन ने राजयोग मेडिटेशन* का अभ्यास कराया।इसके पश्चात सभी *माननीय प्रधान मंत्री जी से लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी रूबरू हुए* जिसमें उन्होंने किए जा रहे इस प्रयास की सराहना की।कार्यक्रम का *कुशल मंच संचालन वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक राम भाई जी* ने किया। अंत में सभी अतिथियों ने ब्रह्माभोजन ग्रहण किया तथा नशामुक्त, स्वस्थ एवं मूल्यनिष्ठ भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
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सुख शांति भवन, नीलबड़ भोपाल द्वारा “ कर्म/ योग द्वारा सशक्त भारत ” विषय पर विशेष कार्यक्रम

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सुख शांति भवन, नीलबड़ भोपाल द्वारा “ कर्म/ योग द्वारा सशक्त भारत ” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय के एनसीसी के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कर्म योग की गहराई से परिचित कराना था, जिससे वे अपने दैनिक जीवन के प्रत्येक कर्म को परमात्मा की याद में रहकर श्रेष्ठ और सुखदायी बना सकें। सुबह से लेकर शाम तक आयोजित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने यह सीखा कि किस प्रकार हर कार्य को ईश्वर स्मृति में रहकर करने से वह कार्य न केवल सफल होता है, बल्कि स्वयं और दूसरों के लिए सुखद अनुभव भी बनता है।

कार्यक्रम के अंत में “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत सभी छात्रों ने नशा मुक्त जीवन जीने की प्रेरणादायक प्रतिज्ञा ली। इस दौरान बीके मिताली बहन ने कार्यक्रम का सुंदर संचालन किया और सभी को सहज एवं प्रभावशाली ढंग से मार्गदर्शन प्रदान किया।

बीके डॉ. प्रियंका द्वारा कर्म योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारत को सशक्त एवं स्वर्णिम बनाने की प्रेरणा दी गई। उन्होंने बताया कि जब हर व्यक्ति अपने कर्मों को योगयुक्त बनाता है, तो समाज और राष्ट्र दोनों ही उन्नति के पथ पर अग्रसर होते हैं।

यह कार्यक्रम युवाओं के लिए एक नई दिशा और सकारात्मक सोच का संदेश लेकर आया, जिससे वे अपने जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाकर स्वयं एवं समाज को बेहतर बना सकें।

ओम शांति

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World Brotherhood Day Blood Donation camp

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ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय में रक्तदान महाअभियान के तहत शिविर जारी”
 *”सर्व प्रथम सुख शांति भवन की निदेशिका राजयोगिनी नीता दीदी एवं साथी ब्रह्मकुमारी बहनों ने उमंग उत्साह से किया रक्तदान”*
 *“विश्व बंधुत्व दिवस पर सुख शांति भवन, नीलबड़ में भी रक्तदान शिविर का शुभारंभ”*
 *“पहले दिन सैकड़ों लोगों ने किया रक्तदान, कल भी रहेगा आयोजन”*
 *“रक्तदान के साथ सभी को दिलाई गई नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा”*
 *”शिविर में रक्तदान को लेकर नगर वासियों में रहा खासा उत्साह”*
भोपाल। विश्व बंधुत्व दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 18वीं पुण्यतिथि पर शनिवार को सुख शांति भवन, नीलबड़ में दो दिवसीय रक्तदान शिविर का शुभारंभ हुआ। यह शिविर संस्था द्वारा चलाए जा रहे रक्तदान महाअभियान का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत पूरे देश के हजारों सेवा केंद्रों पर एक साथ रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
आज पहले दिन बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थानों के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और रक्तदान किया।
सुख शांति भवन की निदेशिका आदरणीय राजयोगिनी नीता दीदी ने बताया कि “रक्तदान केवल किसी ज़रूरतमंद को जीवन देने का कार्य नहीं है, बल्कि यह करुणा, सहयोग और भाईचारे की सजीव मिसाल है। दादी प्रकाशमणि जी का जीवन मानवता की सेवा और विश्व बंधुत्व को समर्पित था, और इस प्रकार के सेवा कार्य उन्हीं के आदर्शों को आगे बढ़ाते हैं।”
डॉ. संजीव जयंत (असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट, हमीदिया अस्पताल) ने कहा कि नियमित रक्तदान दाता के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया तेज होती है, रक्त स्वच्छ और पतला रहता है तथा हृदय रोगों की संभावना कम होती है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्ति की सामूहिक प्रतिज्ञा भी दिलाई गई, जिसमें उन्होंने संकल्प लिया कि वे जीवन में किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
आज रक्तदान करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और दादी प्रकाशमणि जी के जीवन से प्रेरक प्रसंग सुनाए गए। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे आगे भी इस प्रकार के सेवाकार्यों में सक्रिय भागीदारी करेंगे और समाज में सहयोग एवं भाईचारे का संदेश फैलाएँगे।
यह शिविर कल, रविवार 24 अगस्त को भी सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किया जाएगा। संस्था ने नगरवासियों, युवाओं एवं समाजसेवियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर रक्तदान करें और दादी जी के संदेश—“वसुधैव कुटुम्बकम” अर्थात पूरा विश्व ही एक परिवार है—को आत्मसात करें।
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